गांधी भवन में 15 राज्यों के 250 प्रतिनिधियों ने दो दिन तक किया मंथन, नागरिक संगठनों ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों की जमीनी जांच और देशव्यापी आंदोलन का लिया संकल्प
लखनऊ: राजधानी के गांधी भवन में 10 और 11 अक्टूबर को आयोजित जनांदोलनों की दो दिवसीय अखिल भारतीय बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर देशव्यापी आंदोलन तेज करने का ऐलान किया गया। बैठक में शामिल जनांदोलनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने ‘ज्ञानेश हटाओ, एसआईआर रद्द करो’ आंदोलन को उत्तर प्रदेश में आगे बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया। आयोजकों ने मतदाता सूची से हटाए गए ढाई करोड़ मतदाताओं के नामों का सामाजिक अंकेक्षण यानी जमीनी जांच कराने की मांग भी उठाई। कार्यक्रम संयोजक डॉ. वीणा गुप्ता की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, बैठक में 15 राज्यों के करीब 68 संगठनों से जुड़े 250 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। दो दिनों तक सात समूहों में चर्चा के बाद विभिन्न मुद्दों पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए गए।
‘ज्ञानेश हटाओ, एसआईआर रद्द करो’ आंदोलन तेज करने का प्रस्ताव
बैठक में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने की मांग को लेकर देशभर में चल रहे आंदोलनों के प्रति समर्थन जताया गया। साथ ही इन आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित दमन की निंदा की गई। प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश में ‘ज्ञानेश हटाओ, एसआईआर रद्द करो’ आंदोलन को तेज करने और विभिन्न जनांदोलनों को एकजुट करने पर सहमति जताई। बैठक में देशभर में व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने और नागरिक संगठनों के बीच समन्वय मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
ढाई करोड़ मतदाताओं के नामों की जमीनी जांच की मांग
बैठक में पारित प्रस्ताव के अनुसार, मतदाता सूची से हटाए गए ढाई करोड़ मतदाताओं के नामों का सामाजिक अंकेक्षण कराने की मांग उठाई गई। आयोजकों का कहना है कि मतदाता सूची में हुए बदलावों की जमीनी स्तर पर जांच जरूरी है, ताकि मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सके। प्रतिनिधियों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की जरूरत बताई। हालांकि, ढाई करोड़ नाम हटाए जाने के दावे और आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि अलग से किया जाना जरूरी है।
‘जहां खड़े हैं, वहीं जंतर-मंतर है’ के नारे के साथ प्रदर्शन
बैठक में नागरिक संगठनों ने ‘जहां खड़े हैं, वहीं जंतर-मंतर है’ के नारे के साथ अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। इसके जरिए आंदोलन को केवल किसी एक स्थान तक सीमित रखने के बजाय देशभर में स्थानीय स्तर पर सक्रिय करने की रणनीति पर चर्चा की गई। प्रस्ताव में कहा गया कि जनांदोलनों का लक्ष्य देशव्यापी स्तर पर एकजुट आंदोलन खड़ा करने के लिए प्रेरक शक्ति के रूप में काम करना और विभिन्न सामाजिक आंदोलनों के बीच संबंध मजबूत करना है।
विपक्षी दलों से आंदोलन में शामिल होने की अपील
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर हुई चर्चा में चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची में सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने चुनावी प्रक्रिया में सुधार के बिना चुनाव में शामिल होने को लेकर चिंता जताई। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रतिनिधियों ने विपक्षी राजनीतिक दलों से ‘ज्ञानेश हटाओ, एसआईआर रद्द करो’ आंदोलन को तेज करने की अपील की। बैठक में भारत के लिए जन एजेंडा तैयार करने और ‘नो एसआईआर’ मंच के साथ जुड़ने का निर्णय भी लिया गया। इसके साथ ही 14 अक्टूबर को प्रस्तावित बैठक में शामिल होने पर सहमति बनी।
वर्तमान आंदोलन को बताया ‘जेपी आंदोलन पार्ट-2’
बैठक के दौरान वर्तमान जनआंदोलन की तुलना जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन से करते हुए इसे ‘जेपी आंदोलन पार्ट-2’ बताया गया। प्रतिनिधियों ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को याद किया। बैठक में 10 अक्टूबर को बिलारी के आंदोलनकारी राकेश रफीक और 11 अक्टूबर को प्रोफेसर कमल मित्र चिनॉय को श्रद्धांजलि भी दी गई।
15 राज्यों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
बैठक में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और केरल के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रेस विज्ञप्ति में परकला प्रभाकर, तीस्ता सीतलवाड़, थॉमस फ्रेंको, तारा राव, रमेश पटनायक, डॉ. सुनीलम, प्रोफेसर रूपरेखा वर्मा, प्रोफेसर रमेश दीक्षित, पूर्व आईएएस हरीश चंद्र, कैप्टन दिनेश चंद्र, डॉ. वीणा गुप्ता, संजीव सिन्हा, रामधीरज, अनूप श्रमिक, जागृति राही, डॉ. आनंद प्रकाश तिवारी और योगेंद्र यादव सहित कई जनांदोलनकारियों के शामिल होने का उल्लेख किया गया है।
आगे आंदोलन को व्यापक बनाने की तैयारी
बैठक में पारित प्रस्तावों के आधार पर नागरिक संगठनों और जनांदोलनों के बीच समन्वय बढ़ाने, साझा जन एजेंडा तैयार करने और एसआईआर के मुद्दे पर आंदोलन को व्यापक बनाने की रणनीति तय की गई। आयोजकों के मुताबिक, आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में स्थानीय स्तर पर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। बैठक में उठाई गई मांगों और प्रस्तावों पर चुनाव आयोग तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
