नई दिल्ली : देश में रसोई गैस यानी एलपीजी की आपूर्ति को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच सरकार और तेल कंपनियों ने बड़ा कदम उठाया है। घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त एलपीजी उपलब्ध कराने के लिए देश की तेल रिफाइनरियों ने गैस उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक सभी रिफाइनरियां इस समय 100 प्रतिशत क्षमता के साथ काम कर रही हैं, ताकि देशभर में एलपीजी की आपूर्ति सुचारू बनी रहे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार के निर्देश के बाद तेल रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की कमी का सामना न करना पड़े। हाल के दिनों में वैश्विक हालात और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर कुछ आशंकाएं सामने आई थीं। इसी को देखते हुए सरकार ने समय रहते कदम उठाते हुए उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया।
सरकार ने एलपीजी के दुरुपयोग और अनियमितताओं को रोकने के लिए भी कुछ बदलाव किए हैं। अब नए गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच प्रतीक्षा अवधि को 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और घरेलू उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति सही तरीके से पहुंच सकेगी।
इसी बीच एलपीजी आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक भी की। इस बैठक में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद रहे। बैठक में देश में रसोई गैस की संभावित कमी से निपटने और आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
दूसरी ओर गुजरात सरकार ने भी ऊर्जा खपत को संतुलित करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने औद्योगिक गैस के उपयोग में करीब 50 प्रतिशत तक की कटौती करने का फैसला लिया है। राज्य के ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल ने साफ कहा है कि घरेलू एलपीजी वितरण में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी।
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए उद्योगों को दी जाने वाली गैस आपूर्ति में कटौती की गई है। उर्वरक और दूध प्रसंस्करण से जुड़े उद्योगों को भी गैस आपूर्ति में लगभग 40 प्रतिशत की कटौती का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों पर किसी तरह का प्रतिबंध या कटौती नहीं की गई है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि एलपीजी की आपूर्ति और वितरण की सही व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया है। इसके जरिए बाजार में गैस की उपलब्धता और वितरण पर नजर रखी जा सकेगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम यानी एस्मा लागू नहीं किया गया है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक ऊर्जा उपलब्धता के मामले में भारत की स्थिति कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर है। सरकार लगातार कई देशों के साथ संपर्क में है ताकि ऊर्जा आपूर्ति में किसी तरह की रुकावट न आए और देश की जरूरतें समय पर पूरी होती रहें।
सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में कुछ चिंताएं जरूर सामने आई थीं, लेकिन अब हालात सामान्य हैं और एलपीजी की आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रूप से काम कर रही है। देशभर की सभी तेल रिफाइनरियां उत्पादन बनाए रखने के लिए पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। सरकार ने साफ कहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतें उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि सोशल मीडिया पर एलपीजी की कमी को लेकर फैल रही अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें। सरकार का दावा है कि देश में रसोई गैस की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
