सपा सांसदों के सवाल पर मंत्री रामदास अठावले का जवाब, शिकायतों के निस्तारण की जिम्मेदारी राज्यों पर, विपक्ष ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठाए सवाल
नई दिल्ली : अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों के लिए संचालित प्री-मैट्रिक और पोस्ट -मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का मुद्दा लोकसभा में गूंजा।समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी समेत छह सांसदों द्वारा पूछे गए संयुक्त प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि छात्रवृत्ति का वितरण डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और डिजिटल पोर्टल के माध्यम से किया जाता है तथा प्राप्त शिकायतों को संबंधित राज्य सरकारों के पास भेजा जाता है।हालांकि, सरकार किसी भी राज्य में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय नुकसान या दोषियों पर हुई कार्रवाई का राज्यवार विवरण उपलब्ध नहीं करा सकी। यह संयुक्त प्रश्न समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन चौधरी के साथ बाबू सिंह कुशवाहा, हरेन्द्र मलिक, नीरज मौर्य, लालजी वर्मा और देवेश शाक्य ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से पूछा था। सांसदों ने छात्रवृत्ति योजनाओं में भ्रष्टाचार, राज्यवार शिकायतों की संख्या, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, वित्तीय नुकसान की वसूली और निगरानी तंत्र में सांसदों की भागीदारी जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा था।
केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने दिया लिखित उत्तर

लोकसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने लिखित उत्तर में कहा कि छात्रवृत्ति योजनाओं का संचालन डिजिटल प्रणाली और डीबीटी के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है, तो उसे संबंधित राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया जाता है। हालांकि, उन्होंने किसी भी राज्य में कथित घोटालों, वित्तीय नुकसान या दोषियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का विस्तृत राज्यवार ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया।सरकार ने निगरानी समितियों में सांसदों या अन्य जनप्रतिनिधियों को शामिल किए जाने के संबंध में भी कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया।
अनुसूचित जाति-जनजाति छात्रवृत्ति योजनाओं में बड़े घपलों का आरोप
इसे लेकर विपक्षी सांसदों ने सरकार पर जवाबदेही से बचने और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने में गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया।समाजवादी पार्टी के सांसदों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार और हरियाणा सहित कई राज्यों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रवृत्ति योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के मामले सामने आए हैं। उनका कहना है कि इन मामलों में पारदर्शी जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और वित्तीय नुकसान की वसूली सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विपक्ष ने मांग की है कि छात्रवृत्ति योजनाओं में सामने आए कथित घोटालों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, निगरानी व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाया जाए और पात्र छात्रों तक छात्रवृत्ति का लाभ बिना किसी अनियमितता के पहुंचाने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए। वहीं, सरकार का कहना है कि शिकायतों के निस्तारण और जांच की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।
