चुनावी रंजिश में हुई थी नवनिर्वाचित प्रधान की सरेआम हत्या, पत्नी भी हुई थीं घायल, पांच आरोपियों को उम्रकैद, पिता-पुत्र को को राहत
बरेली : यूपी के बरेली शहर के कैंट थाना क्षेत्र के परगवां गांव के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान मुहम्मद इशहाक रिजवी की वर्ष 2021 में चुनावी रंजिश में हुई सनसनीखेज हत्या के बहुचर्चित मामले में करीब पांच साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-1) ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मोहर सिंह उर्फ मोर सिंह, भागवत पटेल, लोकेश पटेल, राहुल उर्फ धीरू और आशिया को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई। वहीं, रतनलाल और उसके पुत्र राहुल को साक्ष्यों के अभाव में राहत दी गई। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) रीतराम राजपूत ने प्रभावी पैरवी की।
चुनावी रंजिश में दिनदहाड़े हुई थी हत्या
यह मामला 20 मई, 2021 का है। शहर के कैंट थाना क्षेत्र के परगवां गांव में पहली बार ग्राम प्रधान चुने गए मुहम्मद इशहाक रिजवी अपनी पत्नी शकीना के साथ दवा लेकर बाइक से गांव लौट रहे थे। आरोप है कि उमरसिया बाग के पास पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने चुनावी रंजिश के चलते उन्हें रोक लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। बताया गया कि इशहाक रिजवी जान बचाने के लिए भागे, लेकिन हमलावरों ने करीब 200 मीटर तक पीछा कर उन पर कई गोलियां दाग दीं। गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी शकीना भी गंभीर रूप से घायल हो गईं।
घटना के बाद गांव में फैला था तनाव
दिनदहाड़े हुई इस हत्या के बाद पूरे परगवां गांव में तनाव फैल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए और काफी देर तक शव उठाने का विरोध करते रहे। हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। तत्कालीन एसएसपी और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। बाद में तत्कालीन आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप और प्रशासन के समझाने पर परिजन व ग्रामीण शांत हुए, जिसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर कैंट थाना पुलिस ने अपराध संख्या 0182/2021 में भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307, 506, 34 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया था। बाद में हुए उपचुनाव में मृतक प्रधान की पत्नी शकीना ग्राम प्रधान निर्वाचित हुईं।
अदालत ने सुनाई कड़ी सजा
करीब पांच साल तक चली सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-1) ने फैसला सुनाते हुए मोहर सिंह उर्फ मोर सिंह, भागवत पटेल, लोकेश पटेल और राहुल उर्फ धीरू को धारा 302/34 IPC में आजीवन कारावास तथा 50,000 -50,000 जुर्माना। धारा 307/34 IPC में 10 वर्ष का कठोर कारावास तथा ₹20,000 जुर्माना। धारा 506 IPC में 7 वर्ष का कारावास तथा ₹10,000 जुर्माना। इसके अलावा संबंधित दोषियों को आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत 3 वर्ष का कारावास और ₹10,000 जुर्माना भी सुनाया गया।
महिला आरोपी आशिया को भी उम्रकैद
अदालत ने महिला आरोपी आशिया को भी साजिश में शामिल मानते हुए धारा 302/120-बी IPC में आजीवन कारावास और ₹50,000 जुर्माना, जबकि धारा 307/120-बी IPC में 10 वर्ष का कारावास और ₹20,000 जुर्माना की सजा सुनाई।
दो आरोपियों को मिली राहत
न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रतनलाल और उसके पुत्र राहुल के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं पाए। इसलिए दोनों को इस मामले में राहत दी गई।
जेल भेजने के दिए निर्देश
अदालत ने आदेश दिया कि दोषियों द्वारा पहले से जेल में बिताई गई अवधि को उनकी सजा में समायोजित किया जाएगा। साथ ही सभी दोषियों के सजायाफी वारंट जारी कर उन्हें जिला कारागार भेजने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित जुर्माना जमा नहीं किया गया तो दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
पांच साल बाद मिला न्याय
कैंट थाना क्षेत्र के चर्चित परगवां प्रधान हत्याकांड में आया यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। चुनावी रंजिश में हुई इस बहुचर्चित हत्या के मामले में अदालत ने पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाकर कड़ा संदेश दिया है, जबकि दो आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में राहत दी गई। यह फैसला लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवार और क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
