38 भवनों के ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ उग्र हुआ विरोध, रुचि वीरा बोलीं- यूनिवर्सिटी को बचाना हमारी पहली प्राथमिकता, सरकार पर लगाए राजनीतिक कार्रवाई के आरोप
रामपुर : मौलाना मुहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को जारी ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को अवैध निर्माण बताकर ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किए जाने के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में शनिवार को समाजवादी पार्टी के 11 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल रामपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों से मुलाकात कर आंदोलन को समर्थन दिया और सरकार पर राजनीतिक द्वेष की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। प्रतिनिधिमंडल पहले रामपुर के संत शिरोमणि गेस्ट हाउस में एकत्र हुआ।
छात्र-छात्राओं के बीच बैठ सुनीं समस्याएं
इसके बाद सभी सांसद जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचे और धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं।प्रतिनिधिमंडल में महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक अबू आसिम आजमी, मुरादाबाद की सांसद नीरज मौर्य, रुचि वीरा, सांसद जियाउर्रहमान, जावेद अली खां, इकरा हसन, देवेश शाक्य, हरेन्द्र मलिक, संत शिरोमणि वर्मा सहित कई सांसद शामिल रहे। हालांकि, रामपुर के सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी इस दौरे में शामिल नहीं हुए। पार्टी नेताओं ने उनकी अनुपस्थिति की वजह स्वास्थ्य संबंधी कारण बताई। हालांकि, इस दौरान रामपुर के सपा जिलाध्यक्ष राजेश सागर, सपा के प्रदेश प्रवक्ता मुहम्मद साजिद, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता मयंक शुक्ला मोंटी, लोधी पीयूष वर्मा, भुवनेश यादव, भारती सिंह चौहान आदि प्रमुख लोग मौजूद थे।
जौहर यूनिवर्सिटी बचाना हमारी पहली प्राथमिकता : नीरज मौर्य
मीडिया से बातचीत में सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि “जौहर यूनिवर्सिटी को बचाना हमारी पहली प्राथमिकता है। शिक्षा संस्थानों को निशाना बनाना उचित नहीं है और समाजवादी पार्टी छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है।”वहीं सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय को भी राजनीतिक और सांप्रदायिक नजरिये से देख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार नफरत की राजनीति कर रही है और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बाद सांसदों ने डीएम से मुलाकात की।
38 भवनों पर ध्वस्तीकरण का नोटिस
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने 15 जुलाई को आदेश जारी करते हुए कहा था कि जौहर यूनिवर्सिटी परिसर के 38 भवनों का निर्माण बिना रामपुर विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नक्शा पास कराए किया गया है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नोटिस का पालन करने के लिए 20 दिन का समय दिया गया है।
18 जुलाई से जारी है छात्रों का धरना
ध्वस्तीकरण नोटिस के विरोध में जौहर यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राएं 18 जुलाई से लगातार धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक भवनों को गिराने का आदेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है।
सपा ने बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा
जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा अब समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक अभियान बनता नजर आ रहा है। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में सपा विधायकों और पूर्व विधायकों का प्रतिनिधिमंडल भी रामपुर पहुंचकर छात्रों से मिला था, जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा था और बाद में आजम खान के परिवार से भी मुलाकात की थी। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। उधर प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार और विकास प्राधिकरण के नियमों के तहत की जा रही है, जबकि समाजवादी पार्टी इसे शिक्षा संस्थान और विपक्ष से जुड़े लोगों के खिलाफ राजनीतिक कार्रवाई बता रही है।
