नई दिल्ली : बजट पेश होने के बाद सोमवार को शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के तुरंत बाद निवेशकों में निराशा का माहौल बना और बिकवाली का दबाव बढ़ गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 1,600 अंकों की भारी गिरावट के साथ 80,600 के स्तर तक फिसल गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 550 अंक टूटकर 24,800 के पास पहुंच गया। हालांकि बाद में बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन गिरावट का असर पूरे दिन बना रहा।
बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सरकार द्वारा फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर लगाए जाने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT में बढ़ोतरी मानी जा रही है। बजट में फ्यूचर्स पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज पर लगने वाले STT को बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है। टैक्स बढ़ने से ट्रेडिंग लागत बढ़ गई है, जिससे शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स और एफ एंड ओ सेगमेंट में सक्रिय निवेशकों में घबराहट देखी गई।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल दो शेयर ही हरे निशान में बंद हुए। सरकारी बैंकिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य सरकारी बैंकों के शेयरों में करीब 4 प्रतिशत तक की गिरावट आई। इसके अलावा BEL और NTPC जैसे बड़े सरकारी उपक्रमों के शेयर भी कमजोर नजर आए। निफ्टी के सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बैंकिंग के अलावा मेटल, मीडिया, आईटी, एफएमसीजी, फार्मा, रियल्टी और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में भी बिकवाली हावी रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स बढ़ोतरी से डेरिवेटिव सेगमेंट में वॉल्यूम घट सकता है, जिसका सीधा असर बाजार की धारणा पर पड़ा है।
हालांकि दोपहर बाद बाजार में कुछ सुधार देखने को मिला और सेंसेक्स करीब 800 अंक की गिरावट के साथ 81,400 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी भी संभलते हुए 250 अंक टूटकर 25,050 के आसपास ट्रेड करता दिखा। इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा पूरी तरह वापस लौटता नहीं दिखा। बजट के आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकार ने पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 34 लाख करोड़ रुपये की आय होने की जानकारी दी है, जिसमें से करीब 26.7 लाख करोड़ रुपये टैक्स से प्राप्त हुए। वहीं सरकार का कुल खर्च 49.6 लाख करोड़ रुपये रहा। इसमें से करीब 11 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के रूप में इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, ब्रिज और अन्य विकास कार्यों पर खर्च किए गए।
आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 36.5 लाख करोड़ रुपये की कुल आय का अनुमान जताया है, जिसमें टैक्स से 28.7 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं कुल खर्च करीब 53.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। बाजार जानकारों का कहना है कि बजट में लंबी अवधि के लिए विकास पर फोकस है, लेकिन फिलहाल टैक्स बढ़ोतरी के कारण बाजार में दबाव बना रह सकता है।
