उदय प्रताप सिंह, पूर्व सांसद, वरिष्ठ लेखक एवं कवि
25 जून 2025 को आपातकाल की 50वीं बरसी थी। वह दिन जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोप दिया था। वरिष्ठ लेखक उदय प्रताप सिंह ने इस मौके पर बीते आपातकाल की भयावह यादों को ताजा कर आज की सरकार पर ‘अघोषित आपातकाल’ चलाने का गंभीर आरोप लगाया।
इमरजेंसी 1975: तब क्या हुआ था?
बिना चेतावनी, रातों-रात विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया। हास्यास्पद आरोपों में मुलायम सिंह यादव और बाबूराम यादव जैसे नेता गिरफ्तार किए गए। आम आदमी बोलने से डरने लगा, मदारी और उसके बंदर तक जेल भेज दिए गए। आज भारत के फिर वहीं हालात?। मोदी सरकार ने 11 वर्षों में नहीं की कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की, जवाबदेही से इनकार की स्थिति है।प्रेस, न्यायपालिका और विधायिका की स्वतंत्रता छीन ली गई, जो भी सरकार से सवाल करता है, देशद्रोही ठहरा दिया जाता है। मीडिया की चुप्पी और जनसंवाद का हनन। स्वतंत्र मीडिया अब विपक्ष से सवाल पूछता है, न कि सरकार से, हर सवाल को राष्ट्रविरोध करार देने की प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
विपक्ष की दबाई जा रही आवाज़
अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं की ओर से संसद और सड़कों पर सवाल पूछे गए। मगर, सरकार की चुप्पी जारी। ऑपरेशन सिंदूर पर न तो संसद का सत्र बुलाया गया, न ही सरकार ने जनता को जानकारी दी।
जमीनी हकीकत बनाम सरकारी दावे
जीडीपी बढ़ने का दावा, लेकिन 82 करोड़ लोग मुफ्त राशन पर निर्भर। बेरोज़गारी, भूख, और महंगाई के सूचकांक में भारत नीचे। मित्र राष्ट्रों तक ने हाल की युद्ध स्थिति में भारत से दूरी बना ली।
यह घोषित नहीं, मगर असली आपातकाल है
लेखक उदय प्रताप सिंह का स्पष्ट मत है कि “आज जो हो रहा है वह घोषित आपातकाल से अधिक ख़तरनाक है। आस्तीन का खंजर हर हथियार से ज़्यादा घातक होता है।”
