लखनऊ : कफ सिरप तस्करी मामले में आज सुबह प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने देशभर में बड़ी कार्रवाई की। यह ऑपरेशन इतना व्यापक था कि इसकी शुरुआत सुबह छह बजे होते ही कई शहरों में एक साथ हलचल मच गई। लखनऊ में इसकी सबसे बड़ी गूंज सुनाई दी, जहां ईडी की टीम सुशांत गोल्फ सिटी स्थित एसटीएफ के बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह की आलीशान कोठी पर पहुंची। सुबह-सुबह भारी पुलिस बल और अधिकारियों की मौजूदगी ने पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना दिया। ईडी के अधिकारी बिना किसी देरी के अंदर घुसे और घंटों तलाशी अभियान चलाया।
सूत्र बताते हैं कि इस तलाशी के दौरान टीम को कई अहम और संदेहास्पद दस्तावेज मिले। बैंक लेनदेन से जुड़ी फाइलें, डिजिटल डिवाइस, मोबाइल डेटा और कथित हवाला एंट्रीज से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। माना जा रहा है कि यही कागजात इस पूरे रैकेट की परतें खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आलोक प्रताप सिंह हाल ही में गिरफ्तार हुआ था, और उसके खिलाफ पहले से ही कई गंभीर आरोप जांच के दायरे में हैं। उसकी कोठी के बगल में बाहुबली नेता धनंजय सिंह का घर होने के चलते भी पूरे इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।
ईडी की यह कार्रवाई सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रही। इसी के साथ उत्तर प्रदेश के जौनपुर, सहारनपुर और वाराणसी में भी छापेमारी जारी रही। इसके अलावा झारखंड की राजधानी रांची और गुजरात के अहमदाबाद में भी ईडी की टीमें सक्रिय रहीं। यह स्पष्ट संकेत है कि कफ सिरप तस्करी का यह नेटवर्क बहुत बड़ा है और इसकी जड़ें कई राज्यों में फैली हुई हैं। पिछले कुछ महीनों में इस नेटवर्क से जुड़े छह बड़े चेहरों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 68 अन्य आरोपियों को भी पकड़ा जा चुका है। इतनी बड़ी संख्या यह बताने के लिए काफी है कि यह कोई सामान्य तस्करी नहीं बल्कि एक सुव्यवस्थित संगठित अपराध है।
इस रैकेट का मुख्य किंगपिन शुभम जायसवाल बताया जा रहा है, जो अपने साथियों के साथ दुबई में छिपा हुआ है। एजेंसियों को आशंका है कि विदेश में बैठकर वह इस पूरे नेटवर्क को संचालित करता रहा है और भारत में मौजूद उसके साथी तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के काम को अंजाम देते थे। ईडी इस पूरे मामले की जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से कर रही है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि तस्करी से होने वाली भारी कमाई को हवाला चैनलों और फर्जी खातों के जरिए सफेद किया जा रहा था। इसीलिए तलाशी के दौरान मिले बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
आज की इस छापेमारी के बाद यह साफ हो गया है कि एजेंसियां इस नेटवर्क को खत्म करने के लिए पूरी तरह गंभीर हैं। अधिकारी मान रहे हैं कि दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की जांच के बाद आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे सामने आएंगे। जिन जगहों पर रेड की गई है, वहां से मिली जानकारी को एक साथ जोड़कर पूरे रैकेट की नई परतें खुलने की उम्मीद है।
