मेरठ। शहर के काजीपुर क्षेत्र में शनिवार को प्रशासन ने 35 साल पुराने एक कॉम्प्लेक्स में बने 22 दुकानों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। कार्रवाई के पहले ही कारोबारी अपनी दुकानों के सामने बैठकर फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने कहा कि अब उनका क्या होगा, कहां जाएंगे और अपने परिवार का गुजारा कैसे करेंगे।
सुबह साढ़े 11 बजे प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों और दुकानदारों की बड़ी संख्या जमा हो गई। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी। सुरक्षा के लिए कई थानों की फोर्स और PAC तैनात की गई। इसके अलावा ATS के ड्रोन से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत की जा रही है। जानकारी के अनुसार, 288 वर्ग मीटर में बने इस कॉम्प्लेक्स की जमीन काजीपुर के वीर सिंह को आवास के लिए आवंटित की गई थी। हालांकि, 1990 में विनोद अरोड़ा नामक व्यक्ति ने पावर ऑफ अटॉर्नी का गलत इस्तेमाल कर इस जमीन पर अवैध रूप से कॉम्प्लेक्स बनवा लिया।
इस मामले की कानूनी लड़ाई लंबी चली और अंततः सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को आदेश दिया कि यह कॉम्प्लेक्स तीन माह के भीतर खाली कराया जाए और आवास विकास परिषद के तहत इसे ध्वस्त किया जाए। कोर्ट के आदेश के बाद ही प्रशासन ने शनिवार को इस कार्रवाई की शुरुआत की।
ध्वस्तीकरण कार्रवाई के दौरान दुकानदारों ने कहा कि उन्हें न तो प्रशासन ने पूर्व में पर्याप्त सूचना दी और न ही उन्हें वैकल्पिक ठिकाने के लिए कोई व्यवस्था सुझाई गई। उनका कहना था कि उनके कई सालों की कमाई और परिवार का भरण-पोषण इस कार्रवाई से प्रभावित होगा।
प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश पूरा करना उनका कर्तव्य है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की अवैध संरचना को कानूनी प्रक्रिया के तहत नहीं छोड़ा जा सकता। सुरक्षा के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोग और दुकानदार इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित भावनाओं में हैं। एक तरफ कानून का पालन हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि कार्रवाई शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से पूरी की जाएगी।
