बरेली: सिविल लाइंस थाने में छह साल पहले दर्ज सपा नेता आजम खां के खिलाफ भड़काऊ भाषण मामले में मंगलवार को कोर्ट ने फैसला सुना दिया। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आजम खां को बरी कर दिया।
यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज किया गया था। तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी की ओर से सपा नेता आजम खां के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के बाद यह मामला कोर्ट में विचाराधीन था। अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से सभी बहसें पूरी हो चुकी थीं।
मंगलवार को मामले की सुनवाई के लिए आजम खां दोपहर में कोर्ट पहुंचे। एमपी एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट के न्यायाधीश शोभित बंसल ने सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है।
इस फैसले के बाद सपा नेता आजम खां ने कोर्ट परिसर से मीडिया से बातचीत में कहा कि न्यायपालिका ने सही निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे हमेशा लोकतंत्र और कानून का सम्मान करते हैं और सभी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते रहेंगे।
यह मामला पिछले छह सालों से चर्चा में था और राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर मतभेद देखने को मिलते रहे। आजम खां की ओर से कहा गया कि अदालत का फैसला उनकी प्रतिष्ठा के लिए अहम है और इससे राजनीतिक आलोचनाओं पर भी विराम लगेगा।
अदालत के इस फैसले के बाद आजम खां समर्थकों ने राहत की सांस ली और उनका कहना है कि कानून ने सही फैसला सुनाया। मामले की लंबी सुनवाई और मीडिया कवरेज के बाद यह फैसला विवादों को समाप्त करता प्रतीत होता है।
इस प्रकार, सपा नेता आजम खां इस भड़काऊ भाषण मामले से पूरी तरह मुक्त हो गए हैं और राजनीतिक गतिविधियों में अब वे बिना किसी कानूनी अड़चन के सक्रिय रह सकेंगे।
