लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन के समग्र नगरीय विकास की कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इन शहरों का विकास सिर्फ सड़कों, पुलों और भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा ढांचा तैयार किया जाए जिसमें स्थानीय इतिहास, सांस्कृतिक पहचान और आधुनिक सुविधाओं का संतुलन दिखाई दे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी विकास योजनाएं चरणबद्ध ढंग से लागू हों, कार्य समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता वाले हों तथा जनता को इसका सीधा लाभ मिल सके।
समीक्षा बैठक में मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन मंडलों के मंडलायुक्तों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी-अपनी कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं। बताया गया कि अयोध्या, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज की तरह इन शहरों के लिए भी समेकित विकास मॉडल अपनाया जा रहा है। तैयार प्रस्तावों के अनुसार कुल 478 परियोजनाओं की रूपरेखा बनी है, जिनमें मेरठ में 111, कानपुर में 109 और मथुरा-वृंदावन में 258 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इन्हें अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक श्रेणियों में विभाजित कर स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की गई है।
मुख्यमंत्री योगी ने मेरठ में प्रस्तावित बिजली बम्बा बाईपास को लखनऊ ग्रीन कॉरिडोर की तर्ज पर पीपीपी मॉडल में विकसित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विकास योजनाओं में नवाचार, वित्तीय संयोजन और बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जहां संभव हो, वहां निजी क्षेत्र का सहयोग लेने के लिए रेवेन्यू शेयरिंग और पीपीपी मॉडल को अपनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी ढांचा ऐसा बनाया जाए जो यातायात को सुविधाजनक बनाए, पैदल यात्रियों और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दे, हरित विकास को बढ़ावा दे और शहर की पारंपरिक पहचान को और मजबूत करे। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि इन परियोजनाओं को लागू करने के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होगी, तो राज्य सरकार उसे उपलब्ध कराएगी।
