कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: छह साल बाद इंसाफ
बुलंदशहर/लखनऊ : यूपी के बुलंदशहर जिले की बहुचर्चित स्याना हिंसा मामले में आखिरकार छह साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। 3 दिसंबर 2018 को गोवंश के अवशेष मिलने के बाद भड़की हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या कर दी गई थी। अब एडीजे कोर्ट ने पांच अभियुक्तों को उम्रकैद और 33 अन्य को सात-सात साल की सज़ा सुनाई है। इसमें प्रशांत नट, राहुल,डेविड, लोकेन्द्र उर्फ मामा, जॉनी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह सभी चिंगरावठी या आसपास के गांवों से ताल्लुक रखते हैं।
33 को मिली 7 साल की सजा
बजरंग दल नेता योगेशराज,चमन, देवेन्द्र, रोहित राघव, जितेन्द्र गुर्जर, विशाल त्यागी, सतीश लोधी, नितिन पंडित, और कई अन्य को, इन सभी को बलवा, आगजनी, जानलेवा हमला और डकैती की धाराओं में दोषी पाया गया है।
जानें पूरा मामला ?
3 दिसंबर 2018 को स्याना थाना क्षेत्र के महाव गांव के जंगलों में गोवंश के अवशेष मिलने के बाद बजरंग दल और विहिप कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। चिंगरावठी चौकी पर भीड़ ने आगजनी और पत्थरबाजी की। हालात बेकाबू हुए और प्रदर्शन हिंसक बन गया। भीड़ को नियंत्रित करने पहुंचे इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को गोली मार दी गई। इसमें उनकी मौत हो गई। एक ग्रामीण सुमित की भी गोली से मौत हुई।
राजद्रोह का आरोप नहीं टिक पाया
FIR में सभी आरोपियों पर राजद्रोह की धाराएं भी लगाई गई थीं, लेकिन अदालत में यह साबित नहीं हो सका। हत्या, आगजनी, बलवा, डकैती आदि धाराओं में उन्हें दोषी ठहराया गया।
पांच आरोपियों का निधन, एक नाबालिग का केस अलग
मुकदमे के दौरान पांच आरोपियों की मौत हो चुकी है। एक नाबालिग आरोपी का केस बाल न्यायालय में लंबित है। यह एक हेट क्राइम और भीड़ हिंसा पर न्यायिक सिस्टम की सख्ती का प्रतीक है। पुलिस अफसर की ऑन-ड्यूटी हत्या पर कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। यह फैसला बताता है कि राजनीतिक और धार्मिक उन्माद में हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जानें क्या बोले लोग
इस फैसले के बाद लोगों ने कहा कि “देर से मिला, मगर इंसाफ मिला… सुबोध जी का बलिदान बेकार नहीं गया।”सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं। “सजा हुई, लेकिन क्या ये नफरत की राजनीति पर रोक लगाएगा?”।
