बांदा : उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद से एक बेहद दुखद और हृदय विदारक खबर सामने आई है। यहां चंद्रावल नदी में नहाने गए तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है, जबकि मृतक बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना सोमवार सुबह की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, गौरी कला और आवारा गांव के बीच बहने वाली चंद्रावल नदी में कुछ बच्चे नहाने के लिए पहुंचे थे। नहाने के दौरान अचानक तीन बच्चे नदी के गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने बच्चों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। घटना की जानकारी पुलिस और प्रशासन को भी दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से नदी में तलाश अभियान शुरू कराया गया। काफी मशक्कत के बाद गोताखोरों ने तीनों बच्चों के शव नदी से बाहर निकाले। मृतकों की पहचान गौरी कला निवासी रामशंकर विश्वकर्मा की 14 वर्षीय बेटी माधुरी और 10 वर्षीय बेटे अंशु के रूप में हुई है। दोनों आपस में भाई-बहन थे। इसके अलावा तीसरे मृतक की पहचान कानपुर नगर के घाटमपुर निवासी पंकज के 13 वर्षीय बेटे प्रतीक के रूप में हुई है।
बताया जा रहा है कि बच्चे नदी में स्नान करने गए थे, तभी अचानक गहराई का अंदाजा न लग पाने के कारण वे पानी में डूब गए। घटना इतनी अचानक हुई कि उन्हें बचाने का मौका नहीं मिल सका। जब तक स्थानीय लोग और अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब तक तीनों बच्चे नदी के पानी में समा चुके थे। शव बरामद होने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
इस दर्दनाक घटना के बाद मृतक बच्चों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी शोक का माहौल बना हुआ है। एक ही परिवार के दो बच्चों की मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। वहीं तीसरे बच्चे के परिजनों पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी और उमस के कारण अक्सर बच्चे नदी और तालाबों में नहाने चले जाते हैं, लेकिन कई बार जल स्रोतों की गहराई और तेज बहाव के कारण ऐसे हादसे हो जाते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी किनारे सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
प्रशासन ने भी इस हादसे को गंभीरता से लेते हुए आम लोगों से अपील की है कि बच्चों को अकेले नदी, तालाब और अन्य जल स्रोतों के पास न जाने दें। विशेष रूप से बरसात के मौसम और जलस्तर बढ़ने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रशासन का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
फिलहाल बांदा के चंद्रावल नदी में हुए इस दर्दनाक हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। तीन मासूम बच्चों की असमय मौत ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया है। सभी की जुबान पर यही सवाल है कि काश समय रहते बच्चों को बचाया जा सकता, तो आज तीन परिवारों की खुशियां यूं मातम में न बदलतीं।
