बिहार में सरकारी दस्तावेज़ों की कलाकारी का नया अध्याय!
पटना/लखनऊ : जहां देशभर में डिजिटल गवर्नेंस और ई-गवर्नेंस की बात हो रही है, तो वहीं बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले निवास प्रमाण पत्र बनवाने को आवेदकों की लंबी भीड़ लगी है। मगर, यहां ब्लूटूथ डिवाइस और ट्रैक्टर को बाकायदा निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है!। एक नहीं, दो नहीं, ये लगातार तीसरा मामला है। जिसने सरकारी सिस्टम की “जांच-पड़ताल” को एक्सपोज कर दिया है।
ब्लूटूथ डिवाइस बना ‘स्थायी निवासी’
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https://youtu.be/smxTvLDE7xQ?si=CFjHz6lG-rOg3veO
पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ब्लूटूथ एयरपॉड के नाम से निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया, और उसे बिहार सरकार की वेबसाइट पर अपलोड भी कर दिया गया। प्रमाण पत्र में लिखा है कि नाम: ब्लूटूथ (नॉयज), पिता का नाम ईस्टवुड ब्लूटूथ,माता का नाम ईस्टवुड, गांव: अगवनपुर, वार्ड 16 थाना अनुमंडल-जिला: बाढ़, पटना। यह 12 जुलाई, 2025 की तारीख है। इस दस्तावेज़ की फोटो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई। एक यूजर ने लिखा: “अब ईयरपॉड भी वोट देगा क्या?”
ट्रैक्टर बनी ‘सोनालिका चौधरी’, पिता ‘बेगूसराय’, मां ‘बलिया देवी’
इससे पहले, मुंगेर के सदर प्रखंड में ट्रैक्टर के नाम से निवास प्रमाण-पत्र जारी हुआ था। आवेदन में दर्ज थे, नाम सोनालिका चौधरी, पिता का नाम बेगूसराय चौधरी, मां का नाम बलिया देवी, मोहल्ल ट्रैक्टरपुर दियारा। यहां सबसे मज़ेदार बात है कि फोटो में ट्रैक्टर की तस्वीर लगी हुई थी, और इसके बावजूद सरकारी बाबुओं ने बिना जांच के दस्तावेज़ को मंज़ूरी दे दी।
जानें कैसे हुआ ये तमाशा?
इन दोनों ही मामलों में ऑनलाइन आवेदन लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम के तहत किए गए थे, लेकिन इनका सत्यापन किसने किया, कैसे किया ?। इसका कोई जवाब नहीं। बिहार में सरकारी अधिकारियों की “भरोसेमंद आंखें” क्या इन मशीनों और वाहनों को इंसान समझ बैठीं?
सोशल मीडिया पर मस्ती की बहार
यह निवास प्रमाण पत्र जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर जमकर मस्ती हो रही है। यूजर तरह- तरह की बातें लिख रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है कि “अब सोनालिका बिटिया का आधार भी बनवा दो!””ब्लूटूथ जी अब राशन कार्ड के लिए अप्लाई करें।””क्या बिहार में स्मार्टफोन की भी जाति होगी?”। लोगों ने प्रशासनिक लापरवाही पर मज़ाकिया तंज़ कसते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है, लेकिन यह मज़ाक गंभीर हैं। ये घटनाएं सिर्फ मीम-माल नहीं, बल्कि सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिहाज से गंभीर खतरे की घंटी हैं। अगर ब्लूटूथ या ट्रैक्टर के नाम से प्रमाण पत्र बन सकता है, तो कोई भी फर्जी व्यक्ति ऐसे दस्तावेज़ बनवाकर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर सकता है। हालांकि, अब तक इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लोग सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से संज्ञान लेने की अपील कर रहे हैं। सवाल ये है कि क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर ये केस भी “सरकारी ठंडे बस्ते” में चला जाएगा?
