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कुमटा/कर्नाटक/दिल्ली : कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले की पहाड़ियों से एक रूसी महिला और उसकी दो बेटियों को पुलिस ने एक गुफा से बचाया। यहां वे लगभग दो सप्ताह से एकांतवास में रह रहे थे। महिला का वीजा 2017 में ही समाप्त हो चुका था, और वह कथित तौर पर भारतीय अध्यात्म से प्रभावित होकर गुफा में ध्यान और पूजा में लीन थी।
कौन है ये महिला और क्या है पूरा मामला?
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40 वर्षीय नीना कुटीना, जिसने भारतीय नाम ‘मोही’ रख लिया है। अपने बच्चों प्रेया (6 वर्ष) और अमा (4 वर्ष) के साथ रामतीर्थ पहाड़ियों की एक दुर्गम गुफा में रह रही थी।
स्थानीय पुलिस को गश्त के दौरान कुछ कपड़े सूखते मिले। जिससे शक हुआ। जब टीम गुफा तक पहुंची तो एक विदेशी महिला ध्यानस्थ अवस्था में मिली। इसके साथ में उसके दो छोटे बच्चे भी थे।
भारत में कब से है और कैसे पहुंची वहां?
मोही 2017 से पहले बिजनेस वीजा पर भारत आई थी, लेकिन उसके बाद उसने देश नहीं छोड़ा। पुलिस का अनुमान है कि वह गोवा से गोकर्ण होते हुए उत्तर कन्नड़ पहुंची। कहा जा रहा है कि हिंदू दर्शन और योग परंपरा से आकर्षित होकर उसने गुफा में साधना करने का फैसला लिया।
गुफा को बनाया आध्यात्मिक स्थल
मोही ने जिस गुफा में डेरा डाला था, वहां एक रुद्र मूर्ति स्थापित की गई थी। वह दिनभर पूजा, ध्यान और प्राकृतिक जीवन जीने में लीन रहती थी। हालांकि, अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि इतने दिनों तक भोजन, पानी और सुरक्षा का प्रबंध वह कैसे कर रही थी।
स्वास्थ्य ठीक, लेकिन कानूनी संकट में
उत्तर कन्नड़ के पुलिस अधीक्षक एम. नारायण ने मीडिया से कहा कि “यह चौंकाने वाला था कि कोई महिला दो बच्चों के साथ ऐसी दुर्गम जगह में रह रही थी। सौभाग्य से वे सभी सुरक्षित और स्वस्थ हैं। उन्हें फिलहाल गोकर्ण के एक आश्रम में अस्थायी रूप से रखा गया है। रूसी दूतावास से संपर्क किया गया है और निर्वासन (Deportation) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें जल्द ही बेंगलुरु भेजा जाएगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला
जैसे ही ये खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर लोग ‘भारत में ध्यानस्थ विदेशियों’ को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं करने लगे। कुछ लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रभाव कहा, तो वहीं कुछ ने वीजा नियमों की अनदेखी पर सवाल उठाए।
