पटना : बिहार में नई सरकार के गठन के 22 दिन बाद गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार किया गया। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में 32 नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सभी मंत्रियों को शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण कार्यक्रम को पांच-पांच मंत्रियों के समूह में पूरा कराया गया। इस दौरान सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता, सांसद, विधायक और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। समारोह के दौरान पूरे गांधी मैदान में राजनीतिक उत्साह का माहौल देखने को मिला।
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज थीं। आखिरकार गुरुवार को सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए विभिन्न दलों के नेताओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस विस्तार में भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेताओं को शामिल किया गया है। राजनीतिक समीकरणों और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का गठन किया गया है।

भाजपा कोटे से कई प्रमुख नेताओं को मंत्री बनाया गया है। इनमें मिथिलेश तिवारी, नीतीश मिश्रा, रामचंद्र प्रसाद, नंद किशोर राम और केदार गुप्ता जैसे नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा पार्टी के कई अन्य विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। हालांकि इस बार पूर्व केंद्रीय मंत्री मंगल पांडेय को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
इस मंत्रिमंडल विस्तार की सबसे खास बात कई नए चेहरों की एंट्री रही। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को पहली बार मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को भी मंत्री बनाया गया है। दोनों नेताओं की एंट्री को आगामी राजनीतिक रणनीति और युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई पीढ़ी को आगे लाने की कोशिश के तहत इन चेहरों को मौका दिया गया है।

सरकार ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की भी कोशिश की है। मंत्रिमंडल में विभिन्न जातीय समूहों और क्षेत्रों के नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है, ताकि सरकार का संदेश राज्य के हर वर्ग तक पहुंचे। कई पुराने और अनुभवी मंत्रियों को दोबारा मौका दिया गया है, जबकि कुछ नए नेताओं को पहली बार मंत्री पद मिला है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार अनुभव और नई ऊर्जा के संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान समर्थकों में काफी उत्साह दिखाई दिया। कई नेताओं के समर्थक ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ गांधी मैदान पहुंचे। समारोह के बाद नए मंत्रियों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पार्टी नेतृत्व का आभार जताया। कई मंत्रियों ने कहा कि वे जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे और बिहार के विकास को गति देने के लिए पूरी निष्ठा से काम करेंगे।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गठबंधन के सभी दलों को संतुलित प्रतिनिधित्व देकर सरकार ने राजनीतिक एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नए मंत्री अपने विभागों में किस तरह काम करते हैं और सरकार जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती है।
