नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय बाजार से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक हालातों के चलते तेल बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद यह 98.51 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले यानी बुधवार को यह 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा था। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड की कीमत भी 1.6 प्रतिशत बढ़कर 91.75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी महज बाजार की सामान्य हलचल नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर है। खासकर मध्य पूर्व में चल रहे घटनाक्रमों ने ऊर्जा बाजार को काफी प्रभावित किया है। दरअसल, तेहरान द्वारा अमेरिका की ओर से प्रस्तावित युद्धविराम योजना को खारिज कर दिया गया है, जिसके बाद हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव दिया था, लेकिन इसे ठुकरा दिया गया।
इसके साथ ही, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। ईरान ने इस्राइल और खाड़ी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं, जबकि इस्राइल ने तेहरान पर हवाई हमले किए हैं। वहीं अमेरिका ने भी इस क्षेत्र में अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस पूरे तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर देखने को मिल रहा है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है।
मौजूदा हालात में यह जलडमरूमध्य काफी हद तक प्रभावित हुआ है, जिससे तेल की सप्लाई पर दबाव बना हुआ है। यही वजह है कि बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है और कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। जानकारों के अनुसार, जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक तेल की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है, जो चिंता का विषय बनता जा रहा है।
तेल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम जनता की जेब पर भी पड़ता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई और ट्रांसपोर्ट लागत में इजाफा जैसे असर सामने आते हैं। फिलहाल, बाजार की नजरें पूरी तरह से मध्य पूर्व के हालात पर टिकी हुई हैं। यदि तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतें और ऊंचाई छू सकती हैं। वहीं अगर कूटनीतिक स्तर पर कोई समाधान निकलता है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
