लखनऊ में भारतेंदु नाट्य अकादमी के भवन का लोकार्पण, सीएम योगी ने किया उद्घाटन
लखनऊ : राजधानी लखनऊ में रविवार को योगी आदित्यनाथ ने भारतेंदु नाट्य अकादमी के संपूर्ण भवन और दो प्रेक्षागृहों का भव्य लोकार्पण किया। करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से इस भवन का जीर्णोद्धार कराया गया है। इस अवसर पर सीएम ने अकादमी से जुड़े कलाकारों और पूर्व छात्रों को सम्मानित किया, साथ ही ‘रंगभेद’ पत्रिका का विमोचन और स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह का शुभारंभ भी किया गया।
स्वर्ण जयंती समारोह में देशभर के कलाकारों की भागीदारी
गोमती नगर स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी के 50 वर्ष पूरे होने पर आठ दिवसीय स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से कलाकार शामिल हुए हैं। कार्यक्रम के पहले दिन मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया और 15 कलाकारों को सम्मानित किया। इस दौरान ‘आनंद मठ’ सहित कई नाटकों का मंचन भी किया गया, जिसे सीएम ने देखा और सराहा।
लॉकडाउन का जिक्र, सरकार की संवेदनशीलता पर बोले सीएम
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कोविड-19 लॉकडाउन का जिक्र करते हुए कहा कि जब देश में संकट आया, तब सरकार आम लोगों के साथ खड़ी रही। उन्होंने कहा कि प्रवासी कामगारों को सुरक्षित घर पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें निशुल्क राशन भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने ‘आनंद मठ’ नाटक के संदर्भ में कहा कि जब सरकार संवेदनशील नहीं होती, तो समाज में वैसी ही परिस्थितियां पैदा होती हैं।
संस्कृति और इतिहास पर आधारित नाटकों को बढ़ावा देने की अपील
सीएम योगी ने भारतीय संस्कृति और इतिहास पर आधारित नाटकों के मंचन को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटकों का जिक्र करते हुए कहा कि स्कूल और कॉलेजों में महारानी लक्ष्मीबाई और महाराजा सुहेलदेव जैसे महान नायकों पर आधारित नाटक होने चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपने इतिहास से परिचित हो सके।
महाराजा सुहेलदेव और सालार मसूद का किया उल्लेख
अपने भाषण में सीएम ने महाराजा सुहेलदेव और सालार मसूद का जिक्र करते हुए कहा कि सुहेलदेव ने विदेशी आक्रमणकारी को पराजित कर जनता को दासता से मुक्त कराया था। उन्होंने कहा कि ऐसे नायकों को इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए और उनके जीवन पर आधारित नाटकों का मंचन होना जरूरी है।
वोट बैंक की राजनीति पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में वोट बैंक की राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक कारणों से कई ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का नाम लेने से बचते हैं। उन्होंने बिजली पासी और महारानी लक्ष्मीबाई का उदाहरण देते हुए कहा कि इन नायकों को समाज में उचित सम्मान मिलना चाहिए।
