63 याचिकाओं पर फैसला, अन्य आरोपियों को जमानत मिलने की रिपोर्ट
बरेली : 26 सितंबर 2025 को हुई बरेली बवाल के मामले में आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है।हाईकोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा खान और डॉ. नफीस की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने हिंसा से जुड़े कुल 63 मामलों/याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने सोमवार को आदेश जारी किया।उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, तौकीर रजा और डॉ. नफीस को छोड़कर अन्य आरोपियों को जमानत दी गई है। इस बवाल के बाद शहर के अलग -अलग थानों में 10 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थीं।
26 सितंबर 2025 को बरेली में हुआ था बवाल
बरेली में 26 सितंबर 2025 को प्रदर्शन और उसके बाद हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान भीड़ को रोकने की कोशिश के बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में पथराव, फायरिंग और पुलिस पर हमले की घटनाएं हुई थीं।हिंसा के संबंध में अलग-अलग थानों में करीब 10 मुकदमे दर्ज किए गए थे। मौलाना तौकीर रजा को पुलिस और अभियोजन की ओर से मामले में प्रमुख आरोपी/मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है।
हाईकोर्ट में 63 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई
बरेली हिंसा के बाद गिरफ्तार आरोपियों ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने 26 मई 2026 को फैसला सुरक्षित कर लिया था। उस समय जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने बड़ी संख्या में याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की थी। अब अदालत ने 63 याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया है।
अभियोजन ने सुनियोजित हिंसा का लगाया था आरोप
जमानत का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने हिंसा को सुनियोजित बताए जाने की दलील दी थी। अभियोजन के मुताबिक, पुलिस ने पथराव, फायरिंग, आगजनी और पुलिसकर्मियों पर हमले से संबंधित साक्ष्य जुटाए थे। जून 2026 में एक अन्य जमानत मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष अभियोजन ने तौकीर रजा की भूमिका को प्रमुख बताते हुए कई आरोप रखे थे। हालांकि इन आरोपों का अंतिम परीक्षण संबंधित मुकदमों के ट्रायल में होना है।
पुलिसकर्मियों के घायल होने और साक्ष्य मिलने का दावा
पुलिस की ओर से दर्ज मामले में हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, एक कॉन्स्टेबल के हाथ को गोली छूकर निकलने और दूसरे पुलिसकर्मी के घायल होने का उल्लेख किया गया है। पुलिस ने घटनास्थल से 12-बोर के खाली कारतूस, टूटे कांच के टुकड़े और ईंट-पत्थर बरामद होने का दावा भी किया था।
तौकीर रजा को पहले भी नहीं मिली थी राहत
बरेली बवाल से जुड़े एक अन्य मामले में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जून 2026 में मौलाना तौकीर रजा की जमानत अर्जी खारिज की थी। उस सुनवाई में अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश किए गए गवाहों के बयान और वीडियो साक्ष्यों का उल्लेख किया था। इसके बाद जुलाई 2026 में बारादरी थाने में दर्ज एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें जमानत नहीं मिली थी। ये आदेश अलग-अलग मुकदमों से संबंधित हैं, इसलिए प्रत्येक मामले की कानूनी स्थिति अलग है।
अब आगे क्या?
ताजा हाईकोर्ट आदेश के बाद मौलाना तौकीर रजा और डॉ. नफीस को इन जमानत याचिकाओं में राहत नहीं मिली है। वहीं, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार अन्य आरोपियों को जमानत मिलने की जानकारी है। बरेली हिंसा से जुड़े अलग-अलग मुकदमों की न्यायिक प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
