अग्रसेन पार्क में कर्मचारियों ने की बैठक, अफसरों पर मजदूर विरोधी रवैये का आरोप
बरेली : रबड़ फैक्ट्री की जमीन पर बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) की सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमी टाउनशिप योजना को लेकर मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा है। गुरुवत को रामपुर गार्डन स्थित अग्रसेन पार्क में रबड़ फैक्ट्री कर्मचारियों की एक बड़ी बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रशासन और जिलाधिकारी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए। बैठक का संचालन श्रमिक नेता अजय भटनागर ने किया। बैठक का मुख्य एजेंडा 17 दिसंबर को समाचार पत्र में प्रकाशित उस विज्ञापन को लेकर था, जिसमें बरेली विकास प्राधिकरण द्वारा ग्राम रसीला चौधरी, मीरगंज तहसील के ग्राम नौगमा उर्फ फतेहगंज पश्चिम तथा चकबंदी प्रक्रिया में शामिल ग्राम रहपुरा जागीर की भूमि (घाटा संख्या 823, 830, 832) को टाउनशिप योजना के लिए अनुमोदित किए जाने का उल्लेख है। मजदूरों का कहना है कि यह भूमि रबड़ फैक्ट्री से जुड़ी हुई है और अभी न्यायालय में मामला विचाराधीन है।
वेतन और मुआवजे को तरसते मजदूर, जमीन पर योजना को लेकर उबाल

श्रमिक नेता अशोक शर्मा ने आरोप लगाया कि 13 अक्टूबर को डीएम, बरेली ने रबड़ फैक्ट्री श्रमिक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर केवल औपचारिकता निभाई और शासन को प्रस्ताव भेज दिया, जबकि शासन स्तर पर कोई ठोस समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है।मजदूरों का कहना है कि वर्षों से उन्हें अदालत में लंबित मामलों का हवाला देकर उनके वैधानिक भुगतान से वंचित रखा जा रहा है। मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि एनएच-4 सड़क चौड़ीकरण के दौरान अधिग्रहित भूमि की मुआवजा राशि पर उनका अधिकार होते हुए भी प्रशासन कोई स्पष्ट निर्णय नहीं ले रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जमीन का मामला सिविल जज (जू. डि.), बरेली की अदालत में लंबित है, तो उसी जमीन का अनुमोदन किस अधिकार से किया गया।
मजदूर बोले-पूंजीपतियों के लिए नियम, हमारे लिए सिर्फ वाद और तारीख

बैठक में कर्मचारियों ने प्रशासन पर मजदूर विरोधी कार्यशैली का आरोप लगाया। मजदूरों ने कहा कि जनवरी 1999 से 2002 तक श्रम विभाग द्वारा जारी वेतन भुगतान की आरसी बिना वसूली के वापस कर दी गई, वहीं खाना पूर्ति के मामलों में सेठ की गाड़ी, बंगला और बीडी प्लांट कुर्क होने के बावजूद बिना वसूली छोड़ दिए गए। मजदूरों का आरोप है कि प्रशासन ने हमेशा पूंजीपतियों के हितों को प्राथमिकता दी और मजदूरों के साथ धोखा किया।
न्यायालय में मामला लंबित, फिर भी जमीन को मिली मंजूरी
बैठक में सर्वसम्मति से बड़े आंदोलन की रणनीति तय की गई। पहले चरण में सभी कर्मचारी क्षेत्रीय सांसद से मिलकर उन्हें पूरे मामले से अवगत कराएंगे। इसके बाद आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस अहम बैठक में बड़ी संख्या में मजदूर मौजूद रहे। प्रमुख रूप से एस.एन. चौबे, एस.सी. निगम, प्रमोद कुमार, सुबोध कुमार, वेस्ले सिंह, वी.के. सक्सेना, राजीव पाठक, प्रदीप रस्तोगी, आर.सी. शर्मा सहित कई श्रमिक नेता और कर्मचारी शामिल रहे।
