बरेली : निपुण भारत मिशन के तहत चल रहे शैक्षिक मूल्यांकन की विश्वसनीयता पर उस वक्त सवाल खड़े हो गए, जब बरेली में निपुण मूल्यांकन के नाम पर शिक्षकों से रुपये मांगने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग और डायट प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो D.El.Ed प्रशिक्षुओं को निलंबित कर दिया है।मामला बिथरी चैनपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय परेवा कुईया से जुड़ा है, जहां निपुण मूल्यांकन के लिए पहुंचे डायट फरीदपुर के दो D.El.Ed प्रशिक्षु रोहित और सुमित पर शिक्षकों से अवैध रूप से धन मांगने का आरोप लगा था। आरोपों से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद विभाग हरकत में आया।
वीडियो के आधार पर प्रारंभिक जांच, तत्काल कार्रवाई
प्रारंभिक जांच में वीडियो में दोनों प्रशिक्षुओं की भूमिका सामने आने के बाद डायट फरीदपुर द्वारा दोनों को तत्काल प्रभाव से दो सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया गया है।इसके साथ ही दोनों प्रशिक्षुओं को भविष्य में निपुण भारत मिशन की किसी भी मूल्यांकन या आकलन प्रक्रिया में शामिल होने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति गठित
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए डायट फरीदपुर की प्राचार्य डॉ. दीप्ति वार्ष्णेय ने तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया है। समिति पूरे प्रकरण की गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
जहां-जहां मूल्यांकन हुआ, वहां दोबारा होगा आकलन
प्राचार्य डॉ. दीप्ति वार्ष्णेय ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन सभी विद्यालयों में पुनः निपुण मूल्यांकन कराया जाएगा, जहां इन दोनों प्रशिक्षुओं द्वारा पूर्व में आकलन किया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता का प्रभाव बच्चों की शिक्षा, सीखने के स्तर या परिणामों पर न पड़े।
निपुण भारत मिशन में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं : डायट
डायट प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि निपुण भारत मिशन ईमानदार, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन पर आधारित है। इस मिशन में किसी भी तरह की लापरवाही, भ्रष्टाचार या अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था की साख पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में मूल्यांकन प्रक्रिया की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि विभाग की त्वरित कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि निपुण भारत मिशन की विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
