बरेली : शहर के सुभाष नगर क्षेत्र में रामगंगा के पास स्थित एक निजी स्कूल में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब 12वीं कक्षा के तीन छात्रों को फीस बकाया होने का हवाला देकर परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया। मामला उस समय सामने आया जब बुधवार सुबह सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) की 12वीं कक्षा की परीक्षा शुरू हुई, और तीनों छात्र एडमिट कार्ड के लिए स्कूल प्रबंधन के चक्कर काटते रहे। आरोप है कि कि फीस जमा न होने के कारण स्कूल प्रशासन ने छात्रों को प्रवेश पत्र देने से साफ इनकार कर दिया।नतीजतन, छात्र फिजिकल एजुकेशन का पेपर नहीं दे सके, जिससे उनका एक साल बर्बाद होने का खतरा मंडराने लगा है।
एबीवीपी का हंगामा, प्रिंसिपल ऑफिस में जड़ा ताला
घटना की जानकारी मिलते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पदाधिकारी स्कूल पहुंच गए। प्रांत मंत्री आनंद कठेरिया के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रिंसिपल कार्यालय में ताला जड़ दिया गया, और काफी देर तक हंगामा चलता रहा। एबीवीपी पदाधिकारियों का आरोप है कि फीस के नाम पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है, जो पूरी तरह गैरकानूनी और अमानवीय है।
क्या सीबीएसई से मान्यता ही नहीं
इस मामले में आरोप है कि सीबीएसई की सिटी कोऑर्डिनेटर ममता सक्सेना ने किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “सेंट एंड्रू स्कूल” नाम का कोई भी संस्थान सीबीएसई से मान्यता प्राप्त नहीं है। यानी जिस संस्थान में छात्रों को 12वीं की पढ़ाई कराई जा रही थी, वह बोर्ड से संबद्ध ही नहीं है। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि छात्रों का पंजीकरण किस स्कूल के माध्यम से किया गया था और एडमिट कार्ड किस आधार पर जारी किए गए।
स्कूल प्रबंधन की सफाई
स्कूल प्रबंधक मोहित चंद्र का कहना है कि यह एक कोचिंग सेंटर है, न कि सीबीएसई से संबद्ध स्कूल। उनका दावा है कि अभिभावकों को बुलाने के उद्देश्य से एडमिट कार्ड रोके गए थे। हालांकि, इस बयान ने मामले को और उलझा दिया है, क्योंकि यदि यह कोचिंग सेंटर है तो फिर 12वीं बोर्ड परीक्षा की प्रक्रिया में इसकी भूमिका क्या थी?
पुलिस जांच शुरू, कानूनी कार्रवाई के संकेत
सुभाष नगर थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ने मीडिया को बताया कि छात्रों की तहरीर के आधार पर स्कूल प्रबंधक को थाने में बातचीत की गई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। बिना मान्यता संस्थान चलाने, छात्रों को गुमराह करने और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसे गंभीर आरोपों के तहत कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
