डिस्चार्ज की तैयारी के बीच बिगड़ी हालत, मौत से उठे सवाल,परिजनों की एफआईआर की मांग, पुलिस बोली- जांच के बाद होगी कार्रवाई
बरेली : शहर के बारादरी थाना क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप लगा है। सड़क दुर्घटना में घायल युवक की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए थाना बारादरी में तहरीर दी है।
ग्वालियर में हुआ था एक्सीडेंट, बेहतर इलाज के लिए लाए गए बरेली
तहरीर के मुताबिक, महेंद्र पाल (पुत्र स्व. लेखराज), निवासी फरीदपुर, 16 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल ग्वालियर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। 17 फरवरी को परिजन उन्हें बेहतर उपचार के लिए बरेली के एक निजी अस्पताल में लेकर आए, जहां उनका इलाज चल रहा था।
28 फरवरी तक सामान्य बताई थी हालत
परिजनों का आरोप है कि 28 फरवरी तक अस्पताल प्रशासन मरीज की हालत स्थिर और सामान्य बताता रहा। डिस्चार्ज की प्रक्रिया।शुरू कर दी गई थी और पूरा भुगतान भी जमा करा लिया गया था।हालांकि, डॉक्टर ने एक दिन और रुकने की सलाह दी, जिसे परिवार ने मान लिया।
रात में बिगड़ी हालत, नली डालने के दौरान लापरवाही का आरोप
परिजनों के अनुसार, 1 मार्च की रात करीब 12 से 1 बजे के बीच ड्यूटी स्टाफ ने डॉक्टर के निर्देश पर मरीज के हाथ बांध दिए और नाक में नली डाली। आरोप है कि नली सही तरीके से नहीं डाली गई। विरोध के बावजूद दोबारा प्रयास किया गया। जिसके कुछ ही मिनटों में मरीज की हालत बिगड़ गई और उसकी मृत्यु हो गई।
मेडिकल फाइल देने से इनकार का आरोप
परिवार का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने मौत का कारण हृदयाघात बताया, जबकि इलाज के नाम पर बड़ी रकम वसूली गई। साथ ही, मेडिकल फाइल और दस्तावेज मांगने पर उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेफड़े फटे होने की बात
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के फेफड़े फटे होने की बात सामने आई है।परिजनों का दावा है कि दुर्घटना पुरानी थी, और इलाज के दौरान हुई लापरवाही के कारण ही मौत हुई।मृतक अपने पीछे पत्नी मीना और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है। वह पेशे से ड्राइवर था और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था।
पुलिस ने शुरू की जांच
शहर की थाना बारादरी पुलिस का कहना है कि तहरीर प्राप्त हो गई है। मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने निजी अस्पतालों में इलाज की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
