बरेली : दरगाह आला हज़रत पर फ़ाज़िले बरेलवी इमाम अहमद रज़ा खां का 175 वां यौमे रज़ा बड़े ही एहतराम और अकीदत के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम दरगाह के सरपरस्त मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की सदारत में आयोजित हुआ। इसमें बरेली समेत दूर-दराज़ इलाकों से आए उलेमा, शोहरा और बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
महफ़िल-ए-नात और फातिहाख्वानी का हुआ एहतेमाम

महफ़िल का आगाज़ तिलावत -ए-कुरान से हुआ। इसके बाद नातख्वां आसिम नूरी और मुर्तज़ा अज़हरी ने नात व मनकबत पेश कर महफ़िल को रूहानी रंग में रंग दिया। देर रात मुफ्ती अहसन मियां ने दरगाह पर गुलपोशी और फातिहाख्वानी की। इसके बाद अकीदतमंदों को तबर्रुकात की ज़ियारत कराई गई। आखिर में खुसूसी दुआ के साथ महफ़िल का इख्तिताम हुआ और लंगर का भी इंतज़ाम किया गया।
आला हज़रत ने इल्म-ए-दीन की खिदमत में गुज़ार दी जिंदगी
दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने अपने खिताब में कहा कि आला हज़रत की पैदाइश 1856 ईस्वी में बरेली में हुई थी, और उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी इल्म -ए-दीन की खिदमत में गुज़ार दी। उन्होंने लाखों फतवे लिखे और हर मसले पर गहराई से तहकीक के बाद ही राय दी। उनका मशहूर तस्नीफ फतावा रज़विया आज भी दुनिया भर के मुसलमानों के लिए रहनुमा है। इस मौके पर कई उलेमा और जिम्मेदारान मौजूद रहे और सभी ने आला हज़रत की खिदमात को याद करते हुए उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की।
