बरेली : यूपी के बरेली देहात के अलीगंज थाना क्षेत्र के राजपुर कला गांव में बुधवार तड़के एक भयावह हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। सड़क किनारे स्थित व्यापारी शुभम माहेश्वरी उर्फ बॉबी के मकान और उससे लगी दुकानों में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। सुबह करीब 5:30 बजे दुकानों से उठता घना धुआं देखकर ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया, और देखते ही देखते सब कुछ अपनी चपेट में ले लिया।
पहली मंजिल पर फंसा परिवार, ग्रामीणों ने दिखाई इंसानियत
आग की लपटें इतनी तेज थीं कि शुभम का पूरा परिवार मकान की पहली मंजिल पर फंस गया। चारों ओर धुआं और आग का घेरा था, बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा। ऐसे नाज़ुक हालात में गांव के लोगों ने पड़ोसी के मकान से सीढ़ी लगाकर अपनी जान जोखिम में डालते हुए परिवार के सभी सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कुछ मिनट और देर हो जाती, तो जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता था।
तीन दुकानें जलकर राख, लाखों का नुकसान
मकान के नीचे बनी मेडिकल स्टोर, जनरल स्टोर और खाद-बीज की दुकान आग की चपेट में आकर पूरी तरह जल गईं। दुकानों में रखा दवा, किराना, बीज, खाद और अन्य कीमती सामान राख में तब्दील हो गया। आग मकान के भीतर तक फैल गई। जिससे घरेलू सामान भी नहीं बच सका। पीड़ित व्यापारी के अनुसार इस हादसे में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
फायर ब्रिगेड दो घंटे बाद पहुंची, एक गाड़ी में नहीं था पानी
घटना के बाद ग्रामीणों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी, लेकिन लोगों का गुस्सा तब फूट पड़ा जब करीब दो घंटे बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। हैरानी की बात यह रही कि आई दो गाड़ियों में से एक में पानी तक नहीं था। लोग आग से जूझते रहे और जिम्मेदार सिस्टम की सुस्ती साफ दिखाई देती रही।
ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा
फायर ब्रिगेड के भरोसे न बैठते हुए ग्राम प्रधान अतुल गुप्ता ने तत्काल सबमर्सिबल पंप चलवाया। तालाब, नालों और आसपास के घरों से पानी लाकर ग्रामीणों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर वे खुद मोर्चा न संभालते, तो पूरा मकान जलकर गिर सकता था।
12 किलोमीटर की दूरी, फिर भी दो घंटे की देरी
ग्रामीणों का आरोप है कि आंवला से राजपुर कला की दूरी महज 12 किलोमीटर है। आपातकालीन सेवा सामान्य हालात में 15-20 मिनट में पहुंच सकती थी, लेकिन फायर ब्रिगेड को आने में दो घंटे लग गए।सवाल यह है कि अगर गांव वाले खुद न जागते, तो क्या आज कोई बड़ा हादसा हो चुका होता?
