बरेली : कार एजेंसी में नौकरी और नई गाड़ी दिलाने का झांसा देकर 14 लाख 50 हजार रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का कोतवाली पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में लंबे समय से वांछित चल रहे बंटी और बबली को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों ने खुद को नामी कार एजेंसी का सेल्स एजेंट बताकर फर्जी दस्तावेज और रसीदों के जरिए पीड़ित को ठगा था।
जानें पूरा मामला
पीड़ित सुरजीत सिंह, निवासी मोगा (पंजाब) ने कोतवाली बरेली में तहरीर देकर बताया था कि कुछ लोगों ने उनसे संपर्क कर खुद को कार एजेंसी का अधिकृत सेल्स एजेंट बताया।आरोपियों ने कार एजेंसी में नौकरी लगवाने और सस्ती दर पर नई गाड़ी दिलाने का लालच दिया। भरोसा जीतने के लिए फर्जी रसीदें, कागजात और लेनदेन के सबूत भी दिखाए गए। इस झांसे में आकर सुरजीत सिंह ने अलग-अलग किस्तों में कुल 14 लाख 50 हजार रुपये आरोपियों को दे दिए। बाद में जब न तो नौकरी मिली और न ही गाड़ी, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई।
धोखाधड़ी और जालसाजी में दर्ज हुआ मुकदमा
पीड़ित की शिकायत के आधार पर कोतवाली पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी पहले भी इस तरह की ठगी की वारदातों में शामिल रहे हैं।
कौन-कौन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में वांछित चल रही राजवीर कौर,निवासी बरेली, और रंजीत सिंह, निवासी पीलीभीत को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहे थे और शहर छोड़ने की फिराक में थे।
ऐसे हुई गिरफ्तारी
कोतवाली पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि दोनों आरोपी सुरेश शर्मा नगर चौराहे के पास मौजूद हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और दोनों को दबोच लिया। पूछताछ के बाद आरोपियों को विधिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस कर रही नेटवर्क की जांच
पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस ठगी में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। आशंका है कि गिरोह ने इससे पहले भी कई लोगों को इसी तरह कार एजेंसी और नौकरी के नाम पर ठगा हो सकता है। पुलिस अन्य पीड़ितों की तलाश भी कर रही है।
पुलिस ने आम लोगों से की अपील
कोतवाली पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी नौकरी, वाहन या निवेश के नाम पर पैसे देने से पहले संबंधित एजेंसी और दस्तावेजों की पूरी जांच करें, और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
