बरेली : यूपी के बरेली देहात के फतेहगंज पश्चिमी थाना क्षेत्र के रूकमपुर-माधौपुर गांव में 2015 में राहुल कश्यप नाम के युवक की हत्या कर दी गई थी। राहुल के पिता गंगाराम ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि 6 जून 2015 की रात करीब साढ़े आठ बजे उनका बेटा खाना खाकर घर से बाहर निकला था। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। हालांकि, बाद में आरोप लगा कि गांव के ही लोगों ने अपहरण कर उसकी हत्या कर दी और शव नदी में फेंक दिया।
अवैध संबंध के शक में किया था अपहरण और हत्या
पुलिस जांच में सामने आया कि गांव के चेतराम को अपनी पत्नी से राहुल के अवैध संबंध होने का शक था, जबकि मुनीष उर्फ लाखन को अपनी बहन के साथ राहुल के संबंध होने का संदेह था। इसी शक के चलते दोनों ने मिलकर राहुल का अपहरण किया और उसकी हत्या कर दी। मामले में थाना फतेहगंज पश्चिमी में हत्या, अपहरण और सबूत मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
कोर्ट में पेश हुए 8 गवाह
मामले की सुनवाई में कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाह पेश किए गए। गवाहों और सबूतों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई।
दोनों आरोपियों को उम्रकैद, पत्नी बरी
अदालत ने चेतराम और मुनीष उर्फ लाखन को हत्या के मामले में आजीवन कारावास और 40-40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा अपहरण के मामले में 10-10 साल की सजा और 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि सबूत मिटाने के मामले में भी दोनों को अलग से कारावास की सजा दी गई। जुर्माना न भरने पर तीन-तीन महीने की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। वहीं इस मामले में आरोपी चेतराम की पत्नी शारदा देवी को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
