नई दिल्ली/बरेली : विश्व प्रसिद्ध सुन्नी मरकज़ दरगाह आला हजरत से जुड़े युवा सामाजिक कार्यकर्ता फरमान हसन खान (फरमान मियाँ) ने प्रदेश और बरेली का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। वर्ष 2026 की ‘30 अंडर 30’ सूची में मुस्लिम वर्ग से अकेला नाम फरमान हसन खान का शामिल होना, न केवल बरेली बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उनके सामाजिक, शैक्षिक और मानवीय कार्यों की सराहना विश्व प्रसिद्ध अमेरिकी मैगज़ीन द्वारा की गई है।
दीन और दुनिया का संतुलित नेतृत्व आस्था को इबादत नहीं, ख़िदमत का ज़रिया बनाया

फरमान हसन खान, जानशीन -ए-ताजुश्शरिया, क़ाज़ी-ए-हिंदुस्तान असजद रज़ा ख़ान के दामाद हैं, और आला हज़रत द्वारा स्थापित संगठन के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं। उन्होंने आस्था को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रखते हुए उसे समाज सेवा और इंसानियत की ख़िदमत से जोड़ा है। उनका मानना है कि दीन का असली पैग़ाम कमजोर और ज़रूरतमंद इंसान के साथ खड़े होना है।
सामाजिक सेवा को संस्थागत स्वरूप

जमात रज़ा-ए-मुस्तफ़ा और वेलफेयर सोसाइटी की अहम भूमिका फरमान मियाँ सौ वर्ष से अधिक पुरानी सुन्नी -बरेलवी तंजीम जमात रज़ा- ए- मुस्तफ़ा में क़ौमी महासचिव की ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने आला हज़रत ताजुश्शरिया वेलफेयर सोसाइटी की स्थापना कर समाज सेवा को एक संगठित और प्रभावी दिशा दी है। ग़रीबों और ज़रूरतमंदों के लिए ज़मीनी काम करते हैं।
मेडिकल कैंप से शिक्षा तक, हर मोर्चे पर सक्रिय
उनकी कयादत में देश के कई राज्यों में मुफ़्त मेडिकल कैंप, मोतियाबिंद ऑपरेशन,गंभीर बीमारियों की जांच और इलाज में सहयोग,ग़रीब बच्चों की शिक्षा,महिलाओं और युवाओं के लिए कंप्यूटर व डिजिटल प्रशिक्षण
जैसे कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि ये सेवाएं उन इलाकों तक पहुंच रही हैं, जहां बुनियादी सुविधाएं भी सीमित हैं। वह नौजवानों के लिए प्रेरणा हैं।
शिक्षा, सेवा और सकारात्मक सोच पर जोर
फरमान मियाँ युवाओं को सही दिशा देने को अपनी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी मानते हैं। वे नियमित रूप से तरबियती कार्यक्रम, संवाद और मार्गदर्शन के ज़रिए नौजवानों को शिक्षा, सेवा और सकारात्मक सोच से जोड़ रहे हैं। उनका मानना है कि युवा शक्ति ही समाज में स्थायी बदलाव की कुंजी है। इसीलिए सम्मान और राष्ट्रीय पहचान है।
भारत गौरव रत्न अवॉर्ड से हो चुके हैं सम्मानित
समाज के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए 2023 में उन्हें ‘भारत गौरव रत्न अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। इसके अलावा UPSSSC PET 2023 परीक्षा से जुड़े संदर्भों में उनके नाम का सामने आना उनकी बढ़ती राष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है।
कम उम्र में बड़ी मिसाल
आस्था बनी सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की ताक़त कम उम्र में ही फरमान हसन खान ने यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ़, सोच सकारात्मक और मक़सद ख़िदमत का हो, तो आस्था समाज में बदलाव की सबसे बड़ी ताक़त बन सकती है। आज वह न सिर्फ़ वर्तमान समाज के लिए काम कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इंसानियत, भाईचारे और सेवा का रास्ता भी दिखा रहे हैं।
