24 सप्ताह का कठिन प्रशिक्षण पूरा कर सेना में शामिल हुए रिक्रूट्स, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को मिले पदक
बरेली : जाट रेजिमेंट सेंटर के बख्शी परेड ग्राउंड में शनिवार को आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड (पीओपी) समारोह में 1280 अग्निवीर भारतीय सेना का हिस्सा बन गए। 24 सप्ताह के कठिन सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद इन रिक्रूट्स ने देश सेवा की शपथ ली। समारोह में जाट रेजिमेंट सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर हरजीत प्रीतपील सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने परेड की सलामी ली और प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले रिक्रूट्स को पदक प्रदान कर सम्मानित किया। पासिंग आउट परेड का नजारा बेहद भावुक और गौरवपूर्ण रहा। बड़ी संख्या में पहुंचे अभिभावकों और परिजनों ने अपने बेटों को सैनिक की वर्दी में कदमताल करते देख गर्व महसूस किया। परेड के दौरान रिक्रूट्स ने अनुशासन, सैन्य कौशल और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन किया।
अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का दिया संदेश
ब्रिगेडियर हरजीत प्रीतपील सिंह ने नवप्रशिक्षित सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि परेड में गूंजते कदमों की खनक उनके कठिन प्रशिक्षण, समर्पण और अनुशासन की पहचान है। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल रिक्रूट्स के लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी गर्व का क्षण है। उन्होंने सैनिकों से संगठन, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया।उन्होंने कहा, “पलटन ही सैनिक का परिवार होती है और पलटन के प्रति वफादारी ही देश के प्रति वफादारी है।” उन्होंने नए सैनिकों को भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी याद दिलाई।
इन रिक्रूट्स को मिला उत्कृष्टता का सम्मान
परेड के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले रिक्रूट्स को सम्मानित किया गया। कुलवीर को सर्वश्रेष्ठ अकादमिक पदक प्रदान किया गया। चित्रांश तोमर को सर्वश्रेष्ठ युद्ध कौशल एवं शारीरिक दक्षता पदक मिला।सुशांत मलिक को सर्वश्रेष्ठ ड्रिल और विपुल मलिक को सर्वश्रेष्ठ फायर पदक से नवाजा गया। वहीं विवेक को समग्र सर्वश्रेष्ठ रिक्रूट घोषित कर प्रतिष्ठित पदक प्रदान किया गया। मुल्तान कंपनी को विजेता कंपनी का खिताब मिला।
230 वर्षों की गौरवशाली विरासत का हिस्सा बने अग्निवीर
कमांडेंट ने अपने संबोधन में जाट रेजिमेंट की गौरवशाली सैन्य विरासत का भी उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि 230 वर्ष से अधिक पुरानी यह रेजिमेंट देश की विभिन्न महत्वपूर्ण लड़ाइयों में वीरता, साहस और बलिदान का प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि अब इस गौरवशाली इतिहास को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नए सैनिकों के कंधों पर है।
धर्मगुरुओं ने दिलाई देश सेवा की शपथ
समारोह के समापन पर सभी नवप्रशिक्षित सैनिकों को उनके धर्म के अनुसार शपथ दिलाई गई। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मगुरुओं ने उन्हें राष्ट्र सेवा, अनुशासन और कर्तव्य पालन की शपथ दिलाई। इसके बाद पूरा परेड मैदान ‘जय हिंद’ के उद्घोष से गूंज उठा। कमांडेंट ने सभी सैनिकों, उनके अभिभावकों और प्रशिक्षकों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
