सरकारी गोशाला में चारा आपूर्ति के 22,050 रुपये अटके थे, आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्मदाह करने पहुंचा महेंद्र सिंह
बरेली : सरकारी गोशाला में चारा आपूर्ति करने के बाद सात महीने तक भुगतान नहीं मिलने से परेशान एक किसान बुधवार को पेट्रोल की बोतल लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गया। मीरगंज तहसील के परौरा गांव निवासी महेंद्र सिंह ने जनता दर्शन में डीएम अविनाश सिंह के सामने अपनी पीड़ा रखी और बताया कि भुगतान के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद उसकी सुनवाई नहीं हुई। किसान ने आत्मदाह की बात कही तो कलक्ट्रेट में अफरा-तफरी मच गई। डीएम ने तत्काल हस्तक्षेप करते किसान को समझाया और उसे 23 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई। साथ ही परिवार की आजीविका के लिए सेमीखेड़ा सहकारी चीनी मिल में दैनिक भत्ते पर आधारित रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस मामले में संबंधित खंड विकास अधिकारी को तीन दिन के भीतर लंबित भुगतान के संबंध में आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जुलाई में राजकीय गोशाला को की थी आपूर्ति
प्रशासन के मुताबिक महेंद्र सिंह पुत्र हेतराम ने 16 जुलाई 2026 को फतेहगंज पश्चिमी ब्लॉक के रफियाबाद स्थित राजकीय गोशाला में चारे की आपूर्ति की थी। इसके एवज में उसका 22,050 रुपये का भुगतान लंबित था। काफी समय बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं होने से किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा था। उसका कहना था कि मेहनत से चारा उपलब्ध कराने के बावजूद उसे अपनी रकम पाने के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे।
प्रधान से लेकर बीडीओ और एसडीएम कार्यालय तक लगाई गुहार
महेंद्र सिंह के मुताबिक, बकाया भुगतान के लिए उसने ग्राम प्रधान, संबंधित कर्मचारियों और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से कई बार शिकायत की। इसके अलावा एसडीएम कार्यालय में भी अपनी समस्या रखी, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। भुगतान अटकने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था। आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की स्कूल फीस जमा करने में भी परेशानी हो रही थी। किसान के पास करीब छह बीघा जमीन है, लेकिन उससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा था।
पेट्रोल की बोतल लेकर जनता दर्शन में पहुंचा किसान
लगातार चक्कर लगाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से परेशान महेंद्र सिंह बुधवार को अपने साथ पेट्रोल की बोतल लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गया। जनता दर्शन में डीएम अविनाश सिंह के सामने उसने अपनी समस्या रखी और बताया कि वह आर्थिक तंगी से बेहद परेशान है। उसने आत्मदाह करने की बात भी कही। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने तत्काल हस्तक्षेप किया। उन्होंने किसान को समझाया और उसकी समस्या का समाधान कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।
डीएम ने दिलाई 23 हजार रुपये की आर्थिक सहायता
डीएम अविनाश सिंह ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल किसान को 23 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह सहायता डीएम ने अपने स्तर से त्योहार के दृष्टिगत दी, ताकि किसान को तत्काल आर्थिक राहत मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने लंबित 22,050 रुपये के भुगतान के मामले में संबंधित खंड विकास अधिकारी को जांच कर नियमानुसार कार्रवाई पूरी करने के लिए तीन दिन का समय दिया।
परिवार के भरण-पोषण के लिए रोजगार की व्यवस्था
डीएम ने किसान की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसकी आजीविका का स्थायी साधन उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल की। उन्होंने सेमीखेड़ा सहकारी चीनी मिल के महाप्रबंधक को महेंद्र सिंह के लिए दैनिक भत्ते पर आधारित रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि वह काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर सके। डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लेकर समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए। आम लोगों की समस्याओं के समाधान में किसी भी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भुगतान में देरी पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस घटना ने सरकारी गोशालाओं में चारा आपूर्ति करने वाले लोगों के भुगतान और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। एक किसान को अपने ही काम की रकम पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े और आखिरकार उसे आत्मदाह की चेतावनी देकर जिलाधिकारी तक पहुंचना पड़ा। हालांकि, डीएम के हस्तक्षेप से उसे तत्काल आर्थिक सहायता और रोजगार की उम्मीद मिली है। अब देखना होगा कि निर्धारित तीन दिनों में लंबित भुगतान के मामले में क्या कार्रवाई होती है।
