बुलेट मोटरसाइकिल और दो लाख रुपये की मांग को लेकर प्रताड़ित करने का आरोप,शादी के पांच महीने बाद मिट्टी का तेल डालकर जलाने के मामले में दोनों दोषी
बरेली : दहेज उत्पीड़न और विवाहिता को मिट्टी का तेल डालकर जलाने के करीब नौ साल पुराने मामले में बरेली की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सत्र न्यायालय ने पति रिजवान खां और मृतक की सास शबाब को दोषी करार देते हुए सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर अलग-अलग धाराओं में कुल 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।अदालत ने जुर्माने की धनराशि में से 25 हजार रुपये पीड़िता निदा को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया है। यह फैसला 4 नवंबर 2026 को सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार सिंह-द्वितीय की अदालत ने सुनाया। इसमें डीजीसी क्राइम रीतराम राजपूत ने अहम भूमिका निभाई है।
शादी के बाद दहेज को किया उत्पीड़न
अभियोजन पक्ष के अनुसार, निदा का निकाह 19 सितंबर 2016 को मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार रिजवान खां के साथ हुआ था। शादी में लड़की पक्ष की ओर से करीब साढ़े तीन लाख रुपये का दान-दहेज दिया गया था। आरोप था कि शादी के बाद पति रिजवान खां, ननद रूमी, ममिया सास शबाब और अन्य ससुरालीजन कम दहेज लाने का ताना देकर निदा को प्रताड़ित करने लगे। उससे बुलेट मोटरसाइकिल और दो लाख रुपये नकद की मांग की जा रही थी।
15 फरवरी 2017 को मिट्टी का तेल डालकर जलाने का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, 7 फरवरी 2017 को निदा के साथ मारपीट की गई थी। इसकी जानकारी मिलने पर उसके पिता और परिवार के अन्य सदस्य ससुराल पहुंचे और समझाने -बुझाने के बाद उसे अपने साथ ले आए। हालांकि, 15 फरवरी 2017 की रात करीब 10:30 बजे निदा का फोन आया। उसने परिजनों को बताया कि पति रिजवान, सास शबाब, ननद रूमी और परवेज ने मिट्टी का तेल डालकर उसे आग लगा दी है। सूचना मिलते ही पिता और परिजन ससुराल पहुंचे, जहां निदा जली हुई अवस्था में मिली। रात करीब 12 बजे उसका पति उसे मिशन अस्पताल लेकर पहुंचा।पीड़िता ने परिजनों को बताया कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर उसके साथ यह घटना की गई।
2017 में दर्ज हुआ था मुकदमा
इस घटना के बाद निदा के पिता की शिकायत पर 16 फरवरी 2017 को थाना किला में मुकदमा अपराध संख्या 65/2017 दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले में आईपीसी की धारा 498ए, 323, 307 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 3/4 के तहत कार्रवाई की। विवेचना के दौरान साक्ष्य जुटाने के बाद ननद रूमी और परवेज अहमद को आरोपपत्र से अलग कर दिया गया, जबकि पति रिजवान खां और सास शबाब के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। 2 जून 2017 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपपत्र पर संज्ञान लिया। बाद में मामला सुनवाई के लिए सत्र न्यायालय भेज दिया गया।
अदालत ने इन धाराओं में सुनाई सजा
सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार सिंह-द्वितीय ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद पति रिजवान खां और सास शबाब को दोषी करार दिया। अदालत ने दोनों को आईपीसी की धारा 307/34 के तहत सात-सात वर्ष का कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माना, धारा 498ए के तहत एक-एक वर्ष का कारावास और दो-दो हजार रुपये जुर्माना, धारा 323/34 के तहत छह-छह महीने का कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माना तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 के तहत एक-एक वर्ष का कारावास और दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई
पीड़िता को मिलेगा 25 हजार रुपये प्रतिकर
अदालत ने आदेश दिया कि अभियुक्तों पर लगाए गए जुर्माने की कुल धनराशि में से 25 हजार रुपये पीड़िता निदा को प्रतिकर के रूप में दिए जाएं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।अभियुक्तों द्वारा पहले जेल में बिताई गई अवधि को नियमानुसार सजा में समायोजित किया जाएगा। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोनों दोषियों के खिलाफ सजायावी वारंट जारी कर उन्हें सजा भुगतने के लिए जिला कारागार बरेली भेजने का आदेश दिया गया है। करीब नौ साल तक चले इस मामले में अदालत के फैसले के बाद दहेज उत्पीड़न और विवाहिता को जलाने के मामले में पति और सास को सजा सुनाई गई है।
