मिशिगन में अब्दुल एल-सैयद की जीत के बाद ओवैसी ने राजनीतिक पहचान और हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया, उनकी पत्नी का कर्नाटक के भटकल से है पारिवारिक नाता
लखनऊ :अमेरिका के मिशिगन में अब्दुल एल-सैयद की ऐतिहासिक जीत का असर अब भारत की राजनीति में भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीतकर पहले मुस्लिम सांसद बनने जा रहे अब्दुल एल-सैयद को लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उनकी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुसलमानों से अपनी राजनीतिक पहचान और हिस्सेदारी मजबूत करने का आह्वान किया है। ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि मिशिगन में एक अब्दुल जीत गया है, अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को भी अपनी सियासी पहचान मजबूत करनी होगी।
ओवैसी ने उठाया राजनीतिक पहचान का मुद्दा
ओवैसी ने अपने संदेश में कहा कि एक खास राजनीतिक विचारधारा ने ‘अब्दुल’ नाम को तंज के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश की है। उन्होंने लिखा, “एक अब्दुल मिशिगन में जीत गया, अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को अपनी सियासी पहचान मजबूत करनी होगी।” अपने संदेश में उन्होंने ‘अब दरी नहीं बिछाएंगे’ कहकर राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व की जरूरत पर जोर दिया। ओवैसी के इस बयान का संदेश केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं है। इसके जरिए उन्होंने समाज के लोगों से राजनीति में केवल समर्थक या भीड़ का हिस्सा बने रहने के बजाय नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपनी भागीदारी बढ़ाने की बात कही है।
यूपी की राजनीति में हिस्सेदारी की चर्चा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। ओवैसी के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि समाज के युवाओं को शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक नेतृत्व के क्षेत्र में किस तरह आगे बढ़ना चाहिए। उनके संदेश में आत्मनिर्भरता, एकजुटता और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की आवाज उठाने पर जोर दिया गया है।
मिशिगन में अब्दुल एल-सैयद की ऐतिहासिक जीत
मिशिगन, अमेरिका। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल एल-सैयद ने मिशिगन की सीनेट सीट पर रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर जीत दर्ज की है। एसोसिएटेड प्रेस और सीबीएस न्यूज ने उनके पक्ष में चुनावी नतीजे घोषित किए हैं। इस जीत के साथ वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम सांसद बन गए हैं। शुरुआती चुनावी आंकड़ों में उन्हें करीब 52 प्रतिशत और रोजर्स को करीब 46 प्रतिशत वोट मिले। चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एल-सैयद पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘जिहादी’ कहा था। रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स ने भी उनके विचारों और कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए थे। एल-सैयद ने इन आरोपों को खारिज किया था। पेशे से चिकित्सक और पूर्व सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी एल-सैयद ने चुनाव में स्वास्थ्य सुविधाओं, आम परिवारों की आर्थिक स्थिति और ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’ जैसी नीतियों को प्रमुख मुद्दा बनाया।
कर्नाटक के भटकल से भी जुड़ा है परिवार
अब्दुल एल-सैयद की जीत के साथ भारत के कर्नाटक राज्य का भटकल कस्बा भी चर्चा में आ गया है। उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू का परिवार भटकल से जुड़ा है। सारा के दादा जुकाकू शमशुद्दीन मैसूर रियासत में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीडी जत्ती के कार्यकाल के दौरान वित्त उपमंत्री रहे थे। परिवार का क्षेत्र के विकास और शिक्षा से भी जुड़ाव रहा है। अब्दुल एल-सैयद ने भी एक साक्षात्कार में अपने दक्षिण भारतीय पारिवारिक रिश्ते का जिक्र करते हुए कहा था कि दक्षिण भारतीय परिवार में 20 साल रहने के बाद वह वहां की संस्कृति से काफी जुड़ गए हैं और मजाकिया अंदाज में खुद को अरब से ज्यादा भारतीय महसूस करने की बात कही थी। उनकी जीत के बाद भटकल में भी उनके परिवार की भारतीय जड़ों को लेकर चर्चा हो रही है।
