पूर्व सांसद ने संगठन की कार्यप्रणाली और पिछड़े-अति पिछड़े समाज को सम्मान नहीं मिलने पर जताई नाराजगी,क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन लाल लोधी से मुलाकात के बीच राजनीतिक हलचल तेज
बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की राजनीति में आंवला से दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप को लेकर हलचल तेज हो गई है। भाजपा की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा देने संबंधी उनकी फेसबुक पोस्ट सामने आने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अपने त्यागपत्र में उन्होंने पार्टी संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ काम करने वाले लोगों को संगठन में प्रमुख स्थान दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने पिछड़े और अति पिछड़े समाज को पार्टी में उचित स्थान और सम्मान नहीं मिलने की बात कही। धर्मेंद्र कश्यप के इस कदम के बाद एक ओर भाजपा संगठन से उनकी नाराजगी चर्चा में है, तो दूसरी ओर समाजवादी पार्टी में उनकी संभावित वापसी को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।हालांकि, सपा में शामिल होने का कोई औपचारिक ऐलान उनकी ओर से सामने नहीं आया है।
त्यागपत्र में संगठन पर उठाए सवाल

धर्मेंद्र कश्यप ने फेसबुक पर साझा किए गए त्यागपत्र को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को संबोधित किया है। इसमें उन्होंने लिखा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ वोटिंग करने और पार्टी को कमजोर करने वाले नेताओं को संगठन में प्रमुख स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछड़े और अति पिछड़े समाज को पार्टी में उचित स्थान और सम्मान नहीं मिलने से वह आहत हैं। इसी नाराजगी का हवाला देते हुए उन्होंने भाजपा की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से त्यागपत्र देने की बात कही है। धर्मेंद्र कश्यप ने अपने पत्र में किसी नेता का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया है।
‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट के बाद बढ़ी थी चर्चा

धर्मेंद्र कश्यप के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं उस समय तेज हुई थीं, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘टाटा -बाय -बाय’ लिखकर पोस्ट साझा की थी। यह पोस्ट भाजपा की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची सामने आने के बाद चर्चा में आई थी। इसके बाद उनके पार्टी छोड़ने की संभावनाओं पर राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जाने लगे थे। अब त्यागपत्र वाली पोस्ट सामने आने के बाद उनकी नाराजगी फिर चर्चा में है। उनके इस कदम को 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद संगठन में जिम्मेदारियों और कथित भीतरघात के मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस्तीफे के बाद पार्टी की ओर से किसी औपचारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि होने पर घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
पूरन लाल लोधी से मुलाकात भी चर्चा में
इस घटनाक्रम के बीच बृज क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन लाल लोधी की धर्मेंद्र कश्यप से मुलाकात भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों के बीच बातचीत हुई थी। इसके बाद क्षेत्रीय अध्यक्ष ने धर्मेंद्र कश्यप के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी। इसमें दोनों प्रसन्न दिखाई दे रहे थे। इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जरूर हो रही हैं। उस वक्त लग रहा था, शायद उनकी भाजपा से नाराजगी दूर हो गई है।
2014 और 2019 में आंवला से बने सांसद
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। वर्ष 2014 में भाजपा के टिकट पर उन्होंने आंवला लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी। वर्ष 2019 में भी वह इसी सीट से सांसद चुने गए। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी नीरज मौर्य से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणामों के अनुसार, नीरज मौर्य को 4,92,515 वोट मिले थे,जबकि धर्मेंद्र कश्यप को 4,76,546 वोट प्राप्त हुए थे। इस तरह नीरज मौर्य ने 15,969 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। इससे पहले वह दो बार बसपा और सपा के टिकट पर सांसद बने थे। 2024 के चुनाव के बाद धर्मेंद्र कश्यप की राजनीतिक स्थिति और संगठन के भीतर उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। अब उनके त्यागपत्र ने इन चर्चाओं को एक नया संदर्भ दे दिया है।
क्या समाजवादी पार्टी में होगी वापसी?
धर्मेंद्र कश्यप के भाजपा से इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर है। वह पहले समाजवादी पार्टी में भी रह चुके हैं। उन्होंने 2014 में सपा का साथ छोड़ा था। इसलिए उनके पुराने राजनीतिक संबंधों के आधार पर सपा में वापसी की अटकलें लगाई जा रही हैं। उनकी सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की चर्चा और सपा से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने की जानकारी भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय है। बताया जा रहा है कि गुरुवार को वह एक सपा नेता के जन्मदिन के कार्यक्रम में शामिल हुए थे।शुक्रवार को वह पूर्व पार्षद हरवंश कश्यप का हाल जानने एक निजी अस्पताल भी पहुंचे थे। हालांकि, इन मुलाकातों या कार्यक्रमों में शामिल होने को सपा में शामिल होने की पुष्टि नहीं माना जा सकता। धर्मेंद्र कश्यप ने अपने त्यागपत्र में किसी दूसरे राजनीतिक दल में जाने की घोषणा नहीं की है। ऐसे में उनकी संभावित वापसी को फिलहाल अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
समर्थकों की राय के बाद क्या होगा अगला फैसला?
धर्मेंद्र कश्यप के अगले राजनीतिक कदम को लेकर अब उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भूमिका भी चर्चा में है। यदि वह अपने समर्थकों से विचार-विमर्श के बाद कोई फैसला लेते हैं, तो उससे उनके भविष्य की राजनीतिक दिशा स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, उनके त्यागपत्र और संगठन के प्रति नाराजगी से जुड़े बयान सामने हैं, लेकिन आगे वह किस दल के साथ जाएंगे या स्वतंत्र रूप से कोई राजनीतिक निर्णय लेंगे, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।धर्मेंद्र कश्यप के इस घटनाक्रम पर बरेली और रुहेलखंड के राजनीतिक हलकों की निगाहें टिकी हैं। आने वाले दिनों में उनका आधिकारिक बयान, भाजपा संगठन की प्रतिक्रिया और संभावित राजनीतिक बैठकों से आगे की तस्वीर साफ हो सकती है।
