एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर 25 लाख की ठगी, रिटायर्ड बैंक मैनेजर से 11.97 लाख उड़ाए, साइबर पुलिस ने दर्ज किए दोनों मामले, लोगों से सतर्क रहने की अपील
बरेली: उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच बरेली में साइबर ठगों ने दो अलग-अलग मामलों में 37 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली। एक मामले में एस्कॉर्ट सर्विस का झांसा देकर धान व्यवसायी से करीब 25 लाख रुपये ऐंठ लिए गए, जबकि दूसरे मामले में बैंक मुख्यालय का अधिकारी बनकर रिटायर्ड बैंक मैनेजर के खाते से 11.97 लाख रुपये निकाल लिए गए। दोनों मामलों में साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ ठगी का खेल
साइबर थाना प्रभारी धनंजय पांडेय ने मीडिया को बताया कि प्रयागराज में धान का कारोबार करने वाले बरेली निवासी व्यवसायी ने शिकायत दर्ज कराई है कि मई 2026 में फेसबुक पर एस्कॉर्ट सर्विस का एक विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने लिंक पर क्लिक किया। इसके बाद व्हाट्सएप के जरिए उनकी बातचीत शुरू हुई। ठगों ने पहले सेवा शुल्क, फिर रजिस्ट्रेशन फीस, होटल बुकिंग, मेडिकल किट और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर अलग-अलग किस्तों में रुपये जमा कराए। जब काफी भुगतान के बाद भी कोई सेवा नहीं मिली और व्यवसायी ने रकम वापस मांगी, तो ठगों ने परिवार को जानकारी देने और सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर उनसे और पैसे वसूल लिए। पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में करीब 25 लाख रुपये ट्रांसफर किए। पुलिस अब इन खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है।
बैंक अधिकारी बनकर रिटायर्ड मैनेजर को बनाया शिकार
दूसरे मामले में बैंक सेवा से सेवानिवृत्त अखिलेश माथुर साइबर अपराधियों के निशाने पर आ गए। शिकायत के अनुसार, ठग ने खुद को मुंबई स्थित बैंक मुख्यालय का ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बताते हुए फोन किया और पेंशनभोगियों के लिए आजीवन नि:शुल्क क्रेडिट कार्ड देने का दावा किया। बातचीत के दौरान उसने विश्वास में लेकर प्रोविडेंट फंड (पीएफ) नंबर की जानकारी हासिल की और तकनीकी तरीके से मोबाइल नंबर को बैंक खाते से लिंक करा लिया। इसके बाद खाते से कई चरणों में कुल 11,97,818.26 रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने किसी भी समय अपना बैंक खाता नंबर, ओटीपी या एटीएम पिन साझा नहीं किया था, फिर भी उनके खाते से रकम निकल गई।
साइबर पुलिस कर रही जांच
दोनों मामलों में साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और आईपी एड्रेस की जांच कर रही है। जिन खातों में रकम भेजी गई, उनकी भी पड़ताल की जा रही है ताकि ठगी करने वाले गिरोह तक पहुंचा जा सके।
लगातार बदल रहे हैं साइबर ठगी के तरीके
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी अब सोशल मीडिया विज्ञापन, फर्जी ग्राहक सेवा कॉल, केवाईसी अपडेट, क्रेडिट कार्ड ऑफर, निवेश, नौकरी और एस्कॉर्ट सर्विस जैसे बहानों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। कई मामलों में पहले भरोसा बनाया जाता है और फिर मानसिक दबाव या ब्लैकमेलिंग के जरिए बड़ी रकम वसूली जाती है।
क्या रखें सावधानी
सोशल मीडिया पर दिखने वाले संदिग्ध विज्ञापनों पर क्लिक करने से बचें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें। बैंक कभी फोन पर ओटीपी, पिन या गोपनीय जानकारी नहीं मांगता।मोबाइल नंबर, सिम या बैंक खाते से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। किसी भी तरह की ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग या डिजिटल धमकी मिलने पर घबराने के बजाय तुरंत पुलिस से संपर्क करें। इन दोनों मामलों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन ऑफर, विज्ञापन या फोन कॉल पर आंख बंद कर भरोसा न करें और थोड़ी सी सतर्कता बरतकर बड़ी आर्थिक क्षति से बचें।
