सैटेलाइट बस स्टैंड का मामला, पुलिस ने 24 घंटे में ढूंढे माता -पिता, बाल कल्याण समिति ने मां को बच्चे के साथ रहने की दी अनुमति
बरेली: शहर के सैटेलाइट बस स्टैंड से सामने आया तीन माह के मासूम को लावारिस छोड़ने का मामला अब भावनात्मक मोड़ पर पहुंच गया है। हरदोई निवासी दंपती, जो अपने बीमार बेटे को मृत समझकर ठेले के नीचे छोड़ गए थे। अब उसे वापस अपने साथ ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर बच्चे के माता-पिता का पता लगा लिया, जबकि बाल कल्याण समिति ने मां को अस्पताल में बच्चे के साथ रहने की अनुमति दे दी है। फिलहाल बच्चा जिला अस्पताल में भर्ती है।
दौरा पड़ने पर मृत समझ लिया था बच्चा
हरदोई के माधौगंज थाना क्षेत्र निवासी स्वाति ने बताया कि तीन माह पहले उन्होंने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। इनमें एक बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो गई थी, जबकि दूसरा बेटा जीवित बचा। परिवार ने उसका नाम धैर्य रखा। कुछ समय बाद बच्चे को बार-बार दौरे पड़ने लगे। इलाज के लिए दंपती बरेली पहुंचे। स्वाति के अनुसार, शनिवार रात बच्चे को तेज दौरा पड़ा। उसका शरीर ठंडा पड़ गया और वह कोई हरकत नहीं कर रहा था। उन्हें लगा कि बच्चे की मौत हो चुकी है। इसी गलतफहमी में वे उसे सैटेलाइट बस स्टैंड पर एक ठेले के नीचे छोड़कर चले गए।
राहगीरों की सूचना से बची जान
रात में राहगीरों ने ठेले के नीचे पड़े बच्चे को देखा और पुलिस को सूचना दी। चौकी प्रभारी मयंक भारद्वाज मौके पर पहुंचे और 108 एंबुलेंस की मदद से बच्चे को जिला अस्पताल भेजा। डॉक्टरों ने इलाज के बाद उसकी जान बचा ली। बाद में बच्चे को चाइल्डलाइन और बाल संरक्षण व्यवस्था के तहत रखा गया।
सीसीटीवी से 24 घंटे में मिले माता-पिता
पुलिस ने बस स्टैंड और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर महज 24 घंटे में बच्चे के माता-पिता का पता लगा लिया। पूछताछ में दंपती ने बच्चे की पहचान की और बताया कि वह गंभीर बीमारी से पीड़ित है तथा आर्थिक तंगी के कारण उसका इलाज कराने में असमर्थ थे।
बाल कल्याण समिति ने दिए दस्तावेज लाने के निर्देश
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दिनेश चंद्र ने बताया कि दंपती ने बच्चे के जन्म से जुड़े कुछ दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं और बताया है कि उसका जन्म लखनऊ के क्वीन मेरी अस्पताल में हुआ था। हालांकि, पहचान और अभिभावक होने के पर्याप्त साक्ष्य अभी पूरे नहीं हैं। समिति ने बुधवार तक आवश्यक गवाह और दस्तावेज प्रस्तुत करने का समय दिया है। इसके बाद नियमानुसार बच्चे को माता-पिता को सौंपने पर निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल अस्पताल में भर्ती है मासूम
सोमवार को बच्चे को फिर दौरा पड़ने पर दत्तक ग्रहण एजेंसी ने उसे दोबारा जिला अस्पताल के एनआरसीयू वार्ड में भर्ती कराया। बाल कल्याण समिति ने मां स्वाति को बच्चे के साथ अस्पताल में रहने की अनुमति दे दी है, ताकि इलाज के दौरान वह उसकी देखभाल कर सके। यह मामला आर्थिक तंगी, गंभीर बीमारी और माता-पिता की मजबूरी से जुड़ी एक मार्मिक घटना के रूप में सामने आया है। वहीं, बच्चे के जीवित मिलने के बाद मां की ममता फिर जाग उठी और अब पूरा परिवार उसके स्वस्थ होने की दुआ कर रहा है।
