2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने यूपी में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधे,आठ सीटों पर उम्मीदवार घोषित
बरेली : उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा सियासी दांव चला है।भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने उत्तर प्रदेश की आगामी राज्यसभा सीटों के लिए आठ प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। इनमें बरेली से दो प्रमुख नाम आंवला के विधायक और योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह तथा वरिष्ठ भाजपा नेता एवं झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार शामिल हैं। दोनों नामों की घोषणा के बाद बरेली और रूहेलखंड की भाजपा राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्टी के इस फैसले को केवल राज्यसभा का टिकट देने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सामाजिक समीकरण और पुराने राजनीतिक प्रभाव को साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
बरेली से दो चेहरे, संदेश बड़ा
भाजपा ने उत्तर प्रदेश की आठ राज्यसभा सीटों के लिए धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है।उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर 2026 को होना है। भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवार उतारे गए हैं। पार्टी की सूची में मौजूदा राज्यसभा सदस्य एवं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। यानी भाजपा ने इस बार राज्यसभा के लिए कई नए चेहरों और संगठन से जुड़े नेताओं को आगे किया है।
धर्मपाल सिंह: आंवला से राज्यसभा तक बड़ा प्रमोशन
यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह बरेली की आंवला विधानसभा सीट से भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वह कई बार विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उन्हें पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग की जिम्मेदारी मिली हुई है।धर्मपाल सिंह का भाजपा संगठन में भी लंबा अनुभव है। सितंबर 2026 में उन्हें एक बार फिर उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश महामंत्री (संगठन) बनाए रखा गया। संगठन में उनकी भूमिका खासतौर पर बूथ स्तर तक पार्टी की मशीनरी मजबूत करने और चुनावी तैयारियों से जुड़ी रही है।ऐसे में राज्यसभा के लिए उनका चयन कई मायनों में महत्वपूर्ण है।एक तरफ उन्हें संगठन और सरकार दोनों का अनुभव है, तो दूसरी तरफ रूहेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनकी राजनीतिक पकड़ मानी जाती है।भाजपा के लिए यह फैसला 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सत्ता के बीच बेहतर तालमेल बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा सकता है।
श्रुति गंगवार: संतोष गंगवार की राजनीतिक विरासत को नया चेहरा
बरेली से दूसरा बड़ा नाम श्रुति गंगवार का है। वह झारखंड के वर्तमान राज्यपाल और बरेली के वरिष्ठ भाजपा नेता संतोष कुमार गंगवार की बेटी हैं। श्रुति गंगवार अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष भी हैं। संतोष गंगवार बरेली लोकसभा सीट से आठ बार सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में कई बार मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इसके बाद में उन्हें झारखंड का राज्यपाल बनाया गया। ऐसे में उनकी बेटी श्रुति गंगवार को राज्यसभा का टिकट मिलना बरेली की राजनीति में खास महत्व रखता है। श्रुति गंगवार पिछले कुछ समय से बरेली की बहेड़ी विधानसभा में चुनाव लड़ने की कोशिश में जुटी थी, और आसपास के क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं। उनके राज्यसभा प्रत्याशी बनने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को अब नया विस्तार मिलने की संभावना है।
क्या BJP ने संतोष गंगवार की विरासत को आगे बढ़ाया?
बरेली की राजनीति में संतोष गंगवार का लंबे समय तक प्रभाव रहा है। ऐसे में श्रुति गंगवार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को भाजपा के पुराने और प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़े चेहरे को राष्ट्रीय स्तर पर नई भूमिका देने के तौर पर देखा जा रहा है। यह फैसला पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि लंबे समय से पार्टी से जुड़े प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों और स्थानीय नेतृत्व को भविष्य की राजनीति में जगह दी जा सकती है। हालांकि, श्रुति गंगवार का राज्यसभा प्रत्याशी बनना केवल राजनीतिक विरासत तक सीमित नहीं है। पार्टी की आठ सदस्यीय सूची में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का भी स्पष्ट प्रयास दिखाई देता है।
BJP की आठ सदस्यीय सूची में क्या है सियासी संदेश?
भाजपा की सूची में अलग-अलग सामाजिक समूहों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई देती है। कई रिपोर्टों में सूची को तीन OBC, दो दलित और तीन सामान्य वर्ग के चेहरों के सामाजिक संतुलन के रूप में देखा गया है। दो महिला नेताओं प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को भी जगह मिली है। प्रियंका रावत का मायका बरेली में हैं। उनके पति सरकारी नौकरी में अफसर हैं।
प्रकाश पाल: OBC समीकरण पर फोकस
प्रकाश पाल भाजपा के पिछड़ा वर्ग मोर्चा से जुड़े प्रमुख नेता हैं। उनका चयन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले OBC प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की पार्टी की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
विद्यासागर सोनकर: दलित प्रतिनिधित्व
विद्यासागर सोनकर भाजपा के वरिष्ठ संगठनात्मक चेहरों में शामिल हैं। उन्हें दलित प्रतिनिधित्व के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी उम्मीदवारी से पार्टी के गैर-जाटव दलित सामाजिक आधार को साधने की रणनीति का संकेत भी देखा जा रहा है।
प्रियंका सिंह रावत: महिला और अवध का समीकरण
पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत को भी भाजपा ने राज्यसभा का टिकट दिया है। वह बाराबंकी से 2014 में लोकसभा सांसद रह चुकी हैं और वर्तमान में पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनकी उम्मीदवारी महिला प्रतिनिधित्व के साथ अवध क्षेत्र में पार्टी की राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
राम प्रताप सिंह चौहान: संगठन का अनुभवी चेहरा
राम प्रताप सिंह चौहान लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। उनका नाम भी राज्यसभा के लिए घोषित आठ उम्मीदवारों में शामिल है। उनके चयन से संगठन में सक्रिय पुराने और चुनावी अनुभव वाले नेताओं को उच्च सदन में प्रतिनिधित्व देने का संदेश गया है।
राधाकांत ओझा: कानूनी क्षेत्र से राजनीति तक

राधाकांत ओझा इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता और बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। उनका चयन भाजपा की सूची में पेशेवर और कानूनी पृष्ठभूमि वाले चेहरे के रूप में खास है।
गोपी कृष्ण पांडेय: सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व
गोपी कृष्ण पांडेय का नाम भी भाजपा की आठ सदस्यीय सूची में शामिल है। उनके साथ सूची में सामान्य वर्ग के अन्य चेहरों को जगह देकर पार्टी ने सामाजिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया है।
2027 से पहले BJP का चुनावी संदेश
भाजपा की राज्यसभा सूची ऐसे समय आई है जब उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए उम्मीदवारों का चयन केवल उच्च सदन की राजनीति के लिहाज से नहीं देखा जा रहा। पार्टी ने एक ओर संगठन में सक्रिय नेताओं को आगे किया है, वहीं दूसरी ओर OBC, दलित, महिला और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का संतुलन साधने की कोशिश की है। बरेली के लिहाज से देखें तो धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार की जोड़ी भाजपा के लिए खास संदेश देती है। धर्मपाल सिंह के जरिए आंवला, लोध/OBC और संगठनात्मक राजनीति का प्रतिनिधित्व सामने आता है, जबकि श्रुति गंगवार के जरिए बरेली की पुरानी राजनीतिक विरासत, महिला नेतृत्व और गंगवार सामाजिक आधार को प्रतिनिधित्व मिलता है।
बरेली की राजनीति में अब क्या बदलेगा?
राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद दोनों नेताओं की भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ने की संभावना है। धर्मपाल सिंह के मामले में संगठन और सरकार का लंबा अनुभव उनके लिए मजबूत आधार है, जबकि श्रुति गंगवार के सामने अब अपने पिता संतोष गंगवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। उनकी आंवला विधानसभा सीट खाली हो जाएगी। यहां किसी नए प्रत्याशी पर दांव लग जाएगा। भाजपा के इस फैसले से बरेली के साथ-साथ रूहेलखंड की राजनीति में भी नए समीकरण बनने की चर्चा शुरू हो गई है। खासतौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन दोनों नेताओं की नई भूमिका का स्थानीय संगठन और चुनावी राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ता है।
