बरेली: यूपी की बरेली साइबर क्राइम पुलिस ने करोड़ों रुपये के फर्जी जीएसटी और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले का बड़ा खुलासा करते हुए एक संगठित गिरोह के दो शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने करीब एक दर्जन फर्जी और अस्तित्वहीन फर्मों के जरिए लगभग 118 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार (टर्नओवर) दिखाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया। आरोपियों के पास से फर्जी दस्तावेज, लैपटॉप, मोबाइल, चेकबुक, बैंक रिकॉर्ड और कूटरचित आधार कार्ड समेत बड़ी मात्रा में सबूत बरामद हुए हैं।
GST विभाग की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पूरा मामला 30 मई 2026 को सामने आया, जब राज्य कर (GST) विभाग के सहायक आयुक्त ने साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया। शिकायत में बताया गया कि पीसी इंटरप्राइजेस नाम की फर्जी फर्म ने अन्य कंपनियों के साथ मिलकर करीब 20 करोड़ रुपये का फर्जी व्यापार दिखाया और 1.28 करोड़ रुपये से अधिक का GST फ्रॉड किया। इसके बाद एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई। तकनीकी जांच और लगातार निगरानी के बाद 21 जुलाई को मालगोदाम रोड के पास से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
118 करोड़ के फर्जी लेन-देन के मिले सबूत
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान योगेन्द्र शर्मा (गाजियाबाद) और टिम्पु (साहिबाबाद) के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से दो लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, कई बैंक चेकबुक, करोड़ों रुपये के हस्ताक्षरित चेक, फर्जी आधार कार्ड, बैंक दस्तावेज और 100 से अधिक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बरामद किए हैं। बरामद दस्तावेजों में करीब 117.18 करोड़ रुपये के डिजिटल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, फर्जी जीएसटी बिल, गोल्ड इनवॉइस, बैंक स्टेटमेंट और कई फर्जी रेंट एग्रीमेंट भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में करीब 118 करोड़ रुपये के फर्जी टर्नओवर का खुलासा हुआ है।
ऐसे करते थे करोड़ों का GST और ITC फ्रॉड
पूछताछ में मुख्य आरोपी योगेन्द्र शर्मा ने बताया कि वह वर्ष 2017-18 से अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी कंपनियां बनाकर GST फ्रॉड कर रहा था। गिरोह पहले लालच देकर लोगों के नाम पर बैंक खाते और फर्जी फर्में खुलवाता था। इसके बाद फर्जी ई-वे बिल, नकली GST रिटर्न और कागजी कारोबार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत फायदा लिया जाता था। फर्जी कंपनियों के बीच सर्कुलर ट्रेडिंग कर रकम को कई खातों में घुमाया जाता और फिर हवाला, सर्राफा कारोबारियों, फॉरेक्स एक्सचेंज तथा डिजिटल वॉलेट प्लेटफॉर्म के जरिए नकदी निकालकर आपस में बांट ली जाती थी।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश तेज, टीम को मिला इनाम
पुलिस के मुताबिक इस गिरोह में कई अन्य सदस्य भी शामिल हैं। जिनकी तलाश की जा रही है। जांच के दौरान अनमोल, अंकित, शिशिर बंसल, सुनील, दीपक और साहिल समेत अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि बरामद दस्तावेजों के आधार पर कई और फर्जी फर्मों और उनसे जुड़े लोगों की जांच की जा रही है। इस बड़ी कार्रवाई के लिए एसएसपी अनुराग आर्य ने गिरफ्तारी करने वाली साइबर पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की है।
