यूपी बोर्ड की 11वीं-12वीं परीक्षा का बदलेगा पैटर्न, 80 अंक की लिखित परीक्षा और 20 अंक का आंतरिक मूल्यांकन
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होगी नई व्यवस्था, प्रत्येक इकाई से सवाल पूछना होगा अनिवार्य; रटने की प्रवृत्ति खत्म करने पर जोर
बदायूं : नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यूपी बोर्ड की 11वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षाओं के पैटर्न में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अगले शैक्षणिक सत्र से गैर-प्रायोगिक विषयों में 80 अंकों की लिखित परीक्षा होगी, जबकि 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर दिए जाएंगे। वहीं जिन विषयों में अभी 30 अंकों की प्रायोगिक परीक्षा होती थी, उसमें भी बदलाव करते हुए प्रायोगिक परीक्षा के अंक घटाकर 20 कर दिए गए हैं।
80 अंक की लिखित परीक्षा, 20 अंक का आंतरिक मूल्यांकन
जिला विद्यालय निरीक्षक लाल जी यादव ने बताया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों के मूल्यांकन को अधिक व्यापक और व्यावहारिक बनाना है। गैर-प्रायोगिक विषयों में 80 अंक लिखित परीक्षा और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित किए जाएंगे। वहीं, जिन विषयों में 30 अंकों की प्रायोगिक परीक्षा होती थी, अब उसे घटाकर 20 अंक कर दिया गया है। नए परीक्षा पैटर्न में विद्यार्थियों की समझ, विश्लेषण और रचनात्मक क्षमता को अधिक महत्व दिया जाएगा।
हर इकाई से सवाल पूछना होगा अनिवार्य
नए प्रश्नपत्र के स्वरूप में प्रत्येक इकाई से सवाल पूछना अनिवार्य होगा। सभी इकाइयों का अधिभार भी पहले से निर्धारित किया जाएगा। इसके अलावा बाह्य विकल्प की व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। इस बदलाव के बाद छात्रों को प्रश्नपत्र में किसी एक हिस्से को छोड़ने का विकल्प नहीं मिलेगा। उन्हें सभी इकाइयों की तैयारी करनी होगी।
रटने की आदत खत्म करने पर जोर
नई व्यवस्था में रटने की परंपरा को खत्म करने के उद्देश्य से वर्णनात्मक प्रश्नों की संख्या कम की गई है। विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों में केवल आंतरिक विकल्प दिए जाएंगे। ये विकल्प उसी इकाई, समान उद्देश्य और समान कठिनाई स्तर के होंगे। प्रश्नपत्र में ऐसे सवाल शामिल किए जाएंगे, जिनसे विद्यार्थियों की मूल्यांकन क्षमता, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और सृजनात्मक शक्ति का आकलन किया जा सके।
समझ और व्यावहारिक ज्ञान को मिलेगा महत्व
नए परीक्षा पैटर्न का उद्देश्य छात्रों को केवल परीक्षा पास करने के लिए रटने के बजाय विषयों को गहराई से समझने और उन्हें व्यावहारिक जीवन में लागू करने के लिए प्रेरित करना है। इसके जरिए विद्यार्थियों में सोचने, समझने, विश्लेषण करने और रचनात्मक तरीके से समस्याओं का समाधान करने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
क्या बोले डीआईओएस लाल जी यादव
जिला विद्यालय निरीक्षक लाल जी यादव ने कहा कि नई व्यवस्था से छात्रों में रटने की प्रवृत्ति कम होगी। प्रश्नपत्र का नया पैटर्न विद्यार्थियों को हर विषय को गहराई से सीखने और समझने के लिए प्रेरित करेगा। इससे उनके सर्वांगीण विकास में भी मदद मिलेगी। नई व्यवस्था अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होने के बाद 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी भी बदले हुए प्रश्नपत्र के अनुसार करनी होगी।
रिपोर्ट: राजा खान
