संसद परिसर में 31 जुलाई को हुई कथित नाटकीय प्रस्तुति से धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप, अदालत ने परिवादी के बयान के लिए तय की तारीख
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर संसद भवन परिसर में की गई नाटकीय प्रस्तुति का मामला अदालत पहुंच गया है। इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सांसद पप्पू यादव और अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग वाली अर्जी को अदालत ने परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) स्वर्णमाला सिंह की अदालत ने परिवादी के बयान के लिए 2 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।
संसद परिसर में प्रस्तुति को लेकर उठे सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र कुमार शर्मा के मुताबिक, 31 जुलाई 2026 को संसद भवन परिसर में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को दर्शाते हुए एक नाटकीय प्रस्तुति की गई थी। आरोप है कि इस प्रस्तुति के जरिए राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मुद्दा उठाया गया, जिससे सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। इसी आरोप के आधार पर संबंधित नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, धार्मिक भावनाएं आहत होने का यह आरोप है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार होना बाकी है।
रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए अदालत में दाखिल की गई थी अर्जी
अधिवक्ता मनीष पांडे ने राहुल गांधी, पप्पू यादव और सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग करते हुए अदालत में अर्जी दाखिल की थी। अर्जी में आरोप लगाया गया कि संसद परिसर में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर की गई प्रस्तुति से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। इसी आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई थी।
अदालत ने परिवाद के रूप में दर्ज करने का दिया आदेश
अर्जी पर सुनवाई के बाद अदालत ने उसे परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही परिवादी के बयान दर्ज करने के लिए 2 नवंबर की तारीख तय की गई है। अब अगली सुनवाई पर परिवादी का बयान दर्ज किया जाएगा। इसके बाद अदालत मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्णय लेगी।
2 नवंबर की सुनवाई पर टिकी नजरें
अदालत के आदेश के बाद अब मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण परिवादी का बयान दर्ज होना है। इसके बाद अदालत उपलब्ध तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी। फिलहाल अदालत ने अर्जी को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। इसे आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध होना या एफआईआर दर्ज होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
