बरेली : यूपी के बरेली के डीएम/जिला निर्वाचन अधिकारी अविनाश सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को मतदेय स्थलों के संभाजन (Rationalization) को लेकर जनपद के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई। बैठक में DM ने निर्देश दिया कि मतदान केंद्रों और मतदेय स्थलों की पूरी सूची सभी राजनैतिक दलों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि चुनावी तैयारियों में किसी को असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि यदि कोई बी.एल.ओ. अपने कार्य में लापरवाही करता पाया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मतदान पर विशेष जोर

डीएम ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डुगडुगी बजवाकर जनता को मतदान के लिए प्रेरित किया जाए। बिना अनुमति बी.एल.ओ. को मुख्यालय से बाहर नहीं भेजा जाएगा। मतदेय स्थलों की नई आलेख्य सूची तैयार कर, विधायकों, सांसदों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ पुनः बैठक की जाएगी।
जर्जर मतदान भवनों का होगा स्थानांतरण

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन मतदान केंद्रों के भवन पुराने या खराब स्थिति में हैं, उन्हें उसी क्षेत्र में उपलब्ध स्थायी एवं सुरक्षित भवनों में स्थानांतरित किया जाएगा। निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार कार्य अपर जिलाधिकारी (वि./रा.)/उप जिला निर्वाचन अधिकारी संतोष कुमार सिंह ने जानकारी दी कि 29 अक्टूबर से 4 नवंबर 2025: मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन होगा। 6-7 नवंबर: राजनीतिक दलों के साथ मंतव्य तैयार किए जाएंगे। 10 नवंबर को मतदेय स्थलों की आलेख्य सूची का प्रकाशन, 18 नवंबर को सुझाव व आपत्तियों का निस्तारण। 19-21 नवंबर: अंतिम प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजा जाएगा। इस दौरान अपर जिलाधिकारी नगर सौरभ दुबे, नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, ERO/ AERO, और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित रहे।
मैपिक कार्य से गायब 33 बीएलओ का काटा वेतन
नगर मजिस्ट्रेट/निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी विधानसभा -124 अलंकार अग्निहोत्री ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्य में शिथिलता मिलने पर जनपद के 33 बीएलओ का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोकने के निर्देश दिए हैं। नगर मजिस्ट्रेट ने बताया कि 04 नवम्बर 2025 से मतदाताओं के मैपिंग और सत्यापन कार्य शुरू हो गया है,लेकिन कई बीएलओ इसमें लापरवाही बरत रहे हैं। इसे निर्वाचन आयोग के निर्देशों की गंभीर अवहेलना मानते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई है। वेतन रोकने वालों में सहायक अध्यापक, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, लिपिक, लेखपाल, और PWD/नगर निगम/पशुपालन सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। नगर मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट कहा कि “निर्वाचन कार्य अत्यंत संवेदनशील और प्राथमिकता वाला कार्य है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
