हम शांति के दूत हैं, नफरत नहीं फैलाते, कांग्रेस सांसद का सरकार पर निशाना
सहारनपुर/लखनऊ/बरेली : यूपी के बरेली में “आई लव मोहम्मद” पोस्टर को लेकर हुई हिंसा के बाद सियासत और तेज हो गई है। बुधवार यानी आज कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, समाजवादी पार्टी के एमएलसी शहनवाज खान और अमरोहा के पूर्व सांसद एवं कांग्रेस नेता कुंवर दानिश अली को बरेली जाने से पहले ही यूपी पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। इसके अलावा बरेली में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मिर्जा अशफाक सकलैनी, प्रेम प्रकाश अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष समेत प्रमुख कांग्रेसियों को हाउस अरेस्ट किया गया है। बताया जाता है कि कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल बरेली पहुंचकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात करने वाला था, लेकिन प्रशासन ने हालात को देखते हुए इन्हें घर से बाहर निकलने से पहले ही रोक दिया।
सांसद और एमएलसी को ट्रेन से आना था बरेली
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सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को सुबह ही पुलिस ने घर पर नजरबंद कर दिया। सपा एमएलसी शहनवाज खान को भी ट्रेन से बरेली रवाना होने से पहले पुलिस ने घर पर रोक दिया। अमरोहा के पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली के घर के बाहर भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया और कड़ी बैरिकेडिंग की गई।
इमरान मसूद के आरोप
सांसद इमरान मसूद ने कहा “बरेली में एकतरफा कार्रवाई हो रही है। हमें सिर्फ अधिकारियों से मिलना था लेकिन हमें रोका गया।”“हम शांति के दूत हैं, नफरत की राजनीति नहीं कर सकते। सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है।”“फतेहपुर की मस्जिद में तोड़फोड़ हुई, तब कोई कार्रवाई नहीं हुई। मुजफ्फरनगर में दुकानों को लूटा गया, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया।”उन्होंने आगे कहा कि बुलडोजर एक्शन का इस्तेमाल डराने के लिए किया जा रहा है। “हम मोहब्बत की बात करते हैं, लेकिन आज हालत यह है कि पोस्टर दिखाने पर लोगों की टांगे तोड़ दी जाती हैं। संविधान हमारे लिए सबसे ऊपर है, नफरत फैलाने वालों को रोकना होगा।”
9 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल को अफसरों से था मिलना
दरअसल, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से 9 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल बरेली भेजा जा रहा था। इसका नेतृत्व सांसद इमरान मसूद कर रहे थे। यह प्रतिनिधिमंडल आज (1 अक्टूबर) सुबह 11:30 बजे बरेली पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) और अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर हालात की रिपोर्ट लेना चाहता था। लेकिन प्रशासन ने इस यात्रा की अनुमति नहीं दी और नेताओं को उनके आवास पर ही रोक दिया।
अब बरेली के माहौल पर राजनीति तेज
बरेली हिंसा के बाद एक तरफ दरगाह-ए-आला हजरत का पूरा खानदान प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के मंत्री कह रहे हैं कि “बरेली में कानून का बुलडोजर चला है, और पूरे देश में संदेश गया है।”ऐसे में साफ है कि बरेली का मामला अब पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है।
