बरेली : यूपी के बरेली शरीफ़ में शहर-ए-कुतुब हज़रत शाहदाना वली रहमतुल्लाह अलैह का सात दिवसीय सालाना उर्स 24 सितंबर से शुरू हो गया है। उर्स की शुरुआत परचम कुशाई के जुलूस से हुई, जिसमें बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने शिरकत की।शाम 4:30 बजे लाल मस्जिद से परचम का जुलूस रवाना हुआ। जुलूस दरगाह आला हज़रत पर सलाम पेश करने के बाद विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए दरगाह शाहदाना वली पहुंचा। इस जुलूस की कयादत दरगाह आला हज़रत के सज्जादानशीन अल्लामा मुफ़्ती अहसान रज़ा कादरी साहब ने की। रास्तों में माहौल “नारे तकबीर, नारे रिसालत और या हज़रत” की सदाओं से गूंज उठा। श्रद्धालु और अकीदतमंद गुलाब और चमेली की खुशबू बिखेरते हुए मोहब्बत, अमन और भाईचारे का पैग़ाम फैला रहे थे।
यह है उर्स का कार्यक्रम
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उर्स-ए-मुबारक सात दिनों तक चलेगा, जिसमें धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। 24 सितंबर को परचम कुशाई और रात 9 बजे मुशायरा, 25 सितंबर को जुलूस-ए-गागर, नात व मन्क़बत की महफ़िल, और 26–29 सितंबर को रात में महफ़िल-ए-समा (कव्वाली व सूफियाना प्रोग्राम), इस्तेमालई निकाह होगा, दरगाह की ओर से गरीब बच्चियों के निकाह कराए जाएंगे। 30 सितंबर को सुबह 10:30 बजे सैयद बाबा के कुल शरीफ़ के साथ उर्स का समापन होगा।
प्रशासन और इंतज़ामात
दरगाह के मुतवल्ली अब्दुल वाजिद नूरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उर्स को लेकर सभी इंतज़ाम पूरे कर लिए गए हैं। मीडिया प्रभारी वसी अहमद वारसी ने स्वच्छता व्यवस्था पर चिंता जताई और नगर निगम से सहयोग की अपील की। उर्स-ए-शाहदाना वली सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह मोहब्बत, अमन और भाईचारे का पैग़ाम दुनिया तक पहुँचाने का जरिया है।
