ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी में बना बरेली कॉलेज, अब ” एजुकेशन, बिजनेस और मेडिकल हब”
बरेली : ब्रिटिश हुकूमत में यानी 1857 में जहां बरेली कॉलेज सिर्फ 57 छात्रों के साथ शुरू हुआ था। वहीं आज बरेली लाखों छात्रों का एजुकेशन हब बन चुका है। गुलाम भारत में स्थापित इस शहर की पहचान, तब क्रांतिकारियों के संघर्ष से थी, लेकिन आज़ाद भारत में बरेली की नई पहचान बन रही है,शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार और आध्यात्मिकता का संगम।
शिक्षा में बदलाव की इबारत
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1857 में बरेली कॉलेज की स्थापना की थी। ब्रिटिश हुकूमत में भारत में चार कॉलेज खुले थे। इसमें बरेली में बरेली कॉलेज, राजस्थान के अजमेर, मुंबई में, और कोलकाता में। मगर, इसमें बरेली कॉलेज सबसे बड़ा कॉलेज है। यहां लाखों छात्र पढ़ते हैं। 1889 में IVRI (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान) की नींव पड़ी, जो आज भी देश का प्रमुख पशु चिकित्सा संस्थान है। आज बरेली में तीन प्रमुख मेडिकल कॉलेज (SRMS, Rohilkhand और Rajshree) है। MJP रुहेलखंड यूनिवर्सिटी और एक निजी यूनिवर्सिटी, दर्जनों डिग्री कॉलेज ने बरेली को शिक्षा नगरी का खिताब दिया है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर से बदला कायाकल्प
आजादी से पहले सिर्फ एक हाईवे और कच्ची सड़कें थीं। यहां से गुजरने वाला नेशनल हाईवे किला क्रॉसिंग, कुतुबखाना से शहामतगंज से था। मगर, ट्रैफिक बढ़ने के बाद नेशनल हाईवे किला से चौपला, कालीबाड़ी और शहामतगंज हो गया। इसके बाद किला से चौपला, चौकी चौराहा, और शहामतगंज हो गया। मगर, अब बड़ा बाईपास हो गया। बरेली में नेशनल हाईवे (बड़ा बाईपास) के साथ ही मिनी बाईपास, पीलीभीत बाईपास भी हैं। शहर का सबसे पहले ओवरब्रिज किला क्रॉसिंग के ऊपर बना था। मगर, अब कुदेशिया, आईवीआरआई, शहामतगंज, कुतुबखाना, सैटलाइट और चौपला बन चुका है।
रोजगार और इंडस्ट्री की नई पहचान
बरेली में चार प्रमुख इंडस्ट्रियल ज़ोन हैं। इसमें परसाखेड़ा, सीबीगंज, भोजीपुरा और रजऊ हैं। इन ज़ोन में छोटे व मध्यम उद्योगों (MSME) ने युवाओं को रोज़गार से जोड़ा है। हालांकि, कुछ पुराने कारखाने बंद हो गए, पर शहर की आर्थिक गति बनी रही।
कनेक्टिविटी का विस्तार
अब बरेली में 4 रेलवे स्टेशन हैं। इसमें बरेली जंक्शन, सिटी, कैंट और इज्जतनगर, 2 बस अड्डे (सैटलाइट और पुराना बस स्टेशन) हैं। एयरपोर्ट सेवा से भी जुड़ चुका है। जिससे बरेली अब देशभर से सीधे जुड़ा है।
सुन्नी मरकज, और आध्यात्म की विरासत
बरेली की पहचान सुन्नी मरकज ‘आला हज़रत’ से है। जिनकी दरगाह पर हर साल लाखों अकीदतमंद उर्स के समय आते हैं। यहां का झुमका, बांस, सुर्मा और माझा आज भी इंटरनेशनल डिमांड में है, और “झुमका गिरा रे” गीत ने बरेली को बॉलीवुड में अमर बना दिया।
