बरेली : जब देश उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की चर्चा में है, तो इसी बहाने बरेली को भी याद किया जाना चाहिए। जिसने भारत को एक ऐसा उपराष्ट्रपति दिया था। जिसकी न्यायपालिका और शिक्षा जगत में गहरी छाप रही। शहर के बानखाना में 26 फरवरी 1896 जन्म लेने वाले गोपाल स्वरूप पाठक ने देश के चौथे उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। उन्होंने 31 अगस्त 1969 से 30 अगस्त 1974 तक यह जिम्मेदारी निभाई। वह ब्रिटिश शासनकाल में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे और मैसूर (अब कर्नाटक) के राज्यपाल, राज्यसभा सदस्य, और केंद्रीय विधि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्यरत रहे।
केडीईएम इंटर कॉलेज से की पढ़ाई
उन्होंने केडीईएम इंटर कॉलेज, बरेली से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और फिर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए और एलएलबी किया। यही नहीं उत्तराखंड के पूर्व सीएम एनडी तिवारी उनके क्लासफेलो और घनिष्ठ मित्र थे। भारत के पहले उपराष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन थे, और गोपाल स्वरूप पाठक इस पंक्ति के चौथे नाम बने। उन्होंने स्वतंत्र भारत के संवैधानिक निर्माण और उच्च शिक्षा प्रणाली को नई दिशा दी। उनकी सादगी, विद्वता और न्यायप्रियता के कारण उन्हें सभी दलों का सम्मान मिला।
