बरेली : यूपी के बरेली के फतेहगंज पश्चिमी में स्थित एशिया की सबसे बड़ी रबर फैक्ट्री को 5 जुलाई 1999 को अचानक बंद कर दिया गया था। 26 साल बीतने के बाद भी हजारों मजदूरों को उनका बकाया भुगतान नहीं मिला। सोमवार को बरेली के दामोदर पार्क में पूर्व कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन कर ज़िला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। मजदूरों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री को साजिशन बंद किया गया और 400 करोड़ की मशीनरी चोरी गई। फैक्ट्री की 3000 करोड़ मूल्य की 1181 एकड़ ज़मीन बैंकों के हवाले कर दी गई, जबकि किसी भी लोन एग्रीमेंट में यह जमीन गिरवी नहीं रखी गई थी।
कानूनी लड़ाई, लेकिन कोई समाधान नहीं
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2018 में S&C यूनियन ने 271 करोड़ का मजदूरी क्लेम DRT कोर्ट, मुंबई में डाला। फैक्ट्री की सेल डीड के अनुसार, संस्थान बंद होने पर ज़मीन सरकार को लौटनी थी, जो अभी तक नहीं हुआ। अलकैमिस्ट कंपनी, जिसने कोई लोन नहीं दिया, खुद को ललीडर बैंक बनाकर मुम्बई हाईकोर्ट से फैक्ट्री का वाइंडअप घोषित करवा चुकी है।
यह थीं मुख्य मांग
1. इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2001 के आदेश के बाद भी RC की वसूली नहीं हुई।
2. फैक्ट्री की ज़मीन पर नया औद्योगिक हब बनाया जाए, जिससे श्रमिकों को न्याय और युवाओं को रोजगार मिल सके।
65 साल पहले रबर फैक्ट्री की स्थापना
1960 में राज्यपाल ने 1381 एकड़ ज़मीन दी थी। मगर, इसमें शर्त थी कि संस्थान बंद होते ही ज़मीन वापस सरकार को दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं। फैक्ट्री बंद होने के बाद आर्थिक तंगी से जूझने वाले कर्मचारियों ने आत्महत्या कर ली, तो वहीं सैकड़ों परिवार अब भी बदहाल स्थिति में हैं। इस मामले में मुम्बई हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही लिक्विडेशन प्रक्रिया, लेकिन श्रमिकों का क्लेम अधूरा है।
