नई दिल्ली: किसान संघर्ष समिति की 346वीं किसान पंचायत राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। पंचायत में विभिन्न राज्यों से आए किसान नेताओं ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी, किसानों की संपूर्ण कर्जमुक्ति, भूमि अधिग्रहण पर रोक और किसान आंदोलन की आगामी रणनीति सहित कई मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, कथित पुलिस दमन, युवा आंदोलन और सरकारों की किसान-मजदूर नीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
23 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई के विरोध में उठेगी आवाज
किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों की लंबित मांगों को लेकर देशव्यापी कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। उनके अनुसार, 23 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस द्वारा आंदोलनकारियों पर की जा रही कथित कार्रवाई, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे, एसआईआर रद्द करने, मतदाता सूची से हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर प्रदर्शन किए जाएंगे। डॉ. सुनीलम ने कहा कि किसान आंदोलन निर्णायक दौर में पहुंच गया है। उन्होंने किसानों से अपने मुद्दों को लेकर एकजुट रहने और आगामी कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की।
एमएसपी की कानूनी गारंटी और कर्जमुक्ति की मांग प्रमुख
किसान पंचायत में किसानों को एमएसपी पर सी2 लागत के ऊपर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर खरीद की कानूनी गारंटी देने और संपूर्ण कर्जमुक्ति की मांग उठाई गई। मध्य प्रदेश के रीवा से आए किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव अधिवक्ता शिव सिंह ने बताया कि एमएसपी और अन्य किसान मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए गए हैं। नवंबर में प्रस्तावित राष्ट्रीय आंदोलन के तहत रीवा में पक्का मोर्चा लगाने की तैयारी की जा रही है। पंजाब किसान यूनियन की राज्य कमेटी सदस्य जसबीर कौर नट ने एमएसपी में वृद्धि, किसानों के कर्ज, भूमि अधिग्रहण और पानी के बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई। उन्होंने किसानों की जमीन और शिक्षण संस्थानों से जुड़े मामलों में बढ़ते हस्तक्षेप के खिलाफ संयुक्त संघर्ष की आवश्यकता बताई। छत्तीसगढ़ के भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही ने कर्जमाफी नहीं होने से किसानों की जमीन कुर्क होने और नीलामी की आशंका का मुद्दा उठाया। उन्होंने गन्ना किसानों के आंदोलन, बीज उत्पादक किसानों के बकाया भुगतान और धान का उचित मूल्य दिलाने के लिए संघर्ष तेज करने की बात कही।
भूमि अधिकार, सूखा और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे भी उठे
महाराष्ट्र से किसान संघर्ष समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रोफेसर सुशीला ताई मोराळे ने राज्य में सूखे की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी दावों के बावजूद प्रभावित लोगों तक राहत का लाभ नहीं पहुंच पाया है। कर्नाटक जनशक्ति संगठन के अध्यक्ष नूर श्रीधर ने दलितों, आदिवासियों और गरीब किसानों के भूमि अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकारी जमीन पर खेती करने वाले किसानों को कानूनी अधिकार दिलाने, आवंटित जमीन वापस दिलाने और भूमि अधिग्रहण तथा भूमि सुधार कानूनों में किए गए बदलावों के खिलाफ व्यापक आंदोलन की जरूरत बताई। राजस्थान के सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मीणा ने किसानों की कर्जमाफी, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को सहायता, एमएसपी की कानूनी गारंटी और भूमि अधिग्रहण कानून के क्रियान्वयन की मांग की। उन्होंने अरावली क्षेत्र में खनन और जलस्रोतों के विनाश से किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का भी मुद्दा उठाया। ओडिशा से इंसाफ संगठन के नरेंद्र मोहंती ने बताया कि 30 अक्टूबर को नियमगिरि में प्रस्तावित खनन के विरोध में जन आंदोलनों के कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, वरिष्ठ नागरिकों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों को साथ लेकर आंदोलन आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि खनन से आदिवासी समुदायों के अधिकारों, पर्यावरण और पारंपरिक आजीविका पर संकट पैदा हो सकता है।
26 नवंबर को देशभर में 100 स्थानों पर प्रदर्शन की तैयारी
किसान संघर्ष समिति की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, संयुक्त किसान मोर्चा 26 नवंबर को देशभर में 100 स्थानों पर बड़े प्रदर्शन करेगा। किसान पंचायत में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों में किसानों की समस्याओं और आंदोलन की तैयारियों की जानकारी साझा की। पंचायत को मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान और ओडिशा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए किसान नेताओं ने संबोधित किया। इनमें प्रो. सुशीला ताई मोराळे, जसबीर कौर नट, अधिवक्ता शिव सिंह, अधिवक्ता आराधना भार्गव, नूर श्रीधर, तेजराज विद्रोही, हुसैन खान, भरतसिंह झाला, कैलाश मीणा, नरेंद्र मोहंती, इंद्रजीत सिंह शंखू, रामस्वरूप मंत्री, जनक राठौर, संदीप ठाकुर और रामनिवास जाट शामिल रहे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण बहुजन संवाद के यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर किया गया। प्रेस नोट किसान संघर्ष समिति के कार्यालय सचिव भागवत परिहार, मुलताई की ओर से जारी किया गया।
