नहरोसा में तीन किसानों के खाली खेतों तक पहुंचा कटान, धनाराघाट पर निर्माणाधीन सेतु के पास कई पेड़ नदी में बहे; बचाव कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी
पीलीभीत: तराई में बारिश के बाद शारदा नदी का जलस्तर भले ही घटने लगा हो, लेकिन कटान का खतरा अभी टला नहीं है। पूरनपुर क्षेत्र में नदी लगातार किनारों की जमीन को काट रही है। नहरोसा गांव के पास किसानों के खेत कटान की चपेट में हैं, जबकि धनाराघाट पर निर्माणाधीन सेतु के करीब करीब एक एकड़ जंगल की जमीन और कई पेड़ नदी में समा चुके हैं। नदी का कटान आबादी की ओर बढ़ने की आशंका से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। वहीं, बचाव कार्य शुरू नहीं होने से लोगों में नाराजगी भी है।
जलस्तर घटा, लेकिन शारदा का कटान जारी
पूरनपुर क्षेत्र में लगातार हुई बारिश के बाद शारदा नदी उफान पर आ गई थी। अब जलस्तर में कमी आई है और पिछले दो दिनों से कटान की रफ्तार भी कुछ धीमी हुई है। इसके बावजूद नदी किनारों की जमीन को लगातार काट रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, धनाराघाट के पास पिछले सात दिनों से और नहरोसा गांव के समीप चार दिनों से कटान जारी है। शुरुआत में नदी तेजी से जमीन काट रही थी, लेकिन पानी कम होने के बाद इसकी गति धीमी हुई है। इसके बावजूद नदी का किनारा कमजोर पड़ने और कटान आगे बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
धनाराघाट पर एक एकड़ जंगल की जमीन नदी में समाई
धनाराघाट पर निर्माणाधीन सेतु के पास शारदा नदी का कटान लगातार जारी है। नदी ने उसी स्थान पर फिर से कटान शुरू कर दिया है, जहां करीब 15 दिन पहले ग्रामीणों ने पेड़ों को तारों से बांधकर कटान रोकने का प्रयास किया था। ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार से शनिवार शाम तक तारों से बंधे कई पेड़ नदी में समा गए। इसके साथ ही जंगल की करीब एक एकड़ जमीन भी कटान की भेंट चढ़ गई। इससे निर्माणाधीन सेतु के आसपास के क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ गई है।
नहरोसा में किसानों के खेतों तक पहुंचा कटान
नहरोसा गांव के पास शारदा नदी पहले राशिद, इरशाद और रऊफ के गन्ने के खेतों को काट चुकी है। अब कटान इन खेतों से कुछ पीछे स्थित कलीमुद्दीन, अशफाक और अनवार के खाली पड़े खेतों तक पहुंच गया है। नदी का कटान लगातार आगे बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते बचाव के उपाय नहीं किए गए तो नदी आबादी के नजदीक पहुंच सकती है।
जमीन के साथ घर और भविष्य की चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर घटने के बावजूद कटान रुक नहीं रहा है। पानी कम होने के साथ किनारों की मिट्टी कमजोर पड़ रही है और नदी की धार जमीन को काट रही है। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल खेतों की जमीन का नुकसान नहीं है, बल्कि उनकी आजीविका और भविष्य से जुड़ा संकट है। ग्रामीणों की चिंता है कि कटान इसी तरह जारी रहा तो उनके घरों पर भी खतरा बढ़ सकता है।
बचाव कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी
शारदा नदी के लगातार कटान के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि किनारों पर प्रभावी बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि नदी के कटान को रोकने के लिए जल्द जरूरी कदम उठाए जाएं, ताकि खेतों और आबादी को सुरक्षित रखा जा सके।
एसडीएम ने दिए निगरानी और बचाव के निर्देश
कटान के मामले में पूरनपुर के उपजिलाधिकारी मयंक गोस्वामी ने कहा कि संबंधित विभाग को नदी के कटान पर नजर रखने और जरूरी बचाव कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन की ओर से बचाव के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और शारदा नदी के कटान से किसानों तथा जंगल की जमीन को और नुकसान होने से कितना बचाया जा सकता है।
रिपोर्ट: ऋतिक द्विवेदी
