बसपा प्रमुख ने प्रदेश कार्यालय में वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ की बैठक, मतदाता सूची से छूटे पात्र लोगों के नाम दोबारा जुड़वाने और बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने के निर्देश
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने योग्य और जिताऊ उम्मीदवारों के चयन पर जोर देने के साथ एसआईआर के बाद मतदाता सूची की स्थिति की भी समीक्षा की। मायावती ने पदाधिकारियों से कहा कि जिन पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची से छूट गए हैं, उन्हें दोबारा जुड़वाने के लिए प्रयास किए जाएं, ताकि गरीब, युवा, महिलाओं और कमजोर वर्गों के पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहें।
योग्य उम्मीदवारों को ही टिकट देने पर जोर
बैठक में मायावती ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी संगठन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने पदाधिकारियों से योग्य उम्मीदवारों की पहचान करने और चुनावी तैयारियों को समय रहते पूरा करने को कहा। मायावती ने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर भी जोर दिया। एसआईआर के बाद बूथ स्तर की कमेटियों के पुनर्गठन में जो कमियां रह गई हैं, उन्हें समयबद्ध तरीके से दूर करने के निर्देश दिए गए।
एसआईआर के बाद उत्तराखंड में करीब 9 लाख मतदाता कम
उत्तराखंड में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी हो चुकी है। अंतिम सूची में 71,58,949 मतदाता दर्ज हैं। एसआईआर शुरू होने के समय राज्य में 79,60,762 मतदाता थे। इस तरह कुल संख्या में करीब 9.06 लाख की कमी दर्ज हुई है। चुनाव आयोग ने एसआईआर के बाद सूची से बाहर रह गए पात्र मतदाताओं की दोबारा पहचान और नाम जोड़ने के लिए भी प्रक्रिया शुरू की है। बूथ लेवल अधिकारियों को पुराने और नए मतदाता रिकॉर्ड का मिलान कर पात्र लोगों की मदद करने के निर्देश दिए गए हैं।
गरीब और कमजोर वर्गों के मतदाताओं पर मायावती का जोर
मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि एसआईआर के बाद जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची से छूट गए हैं, उन्हें दोबारा जुड़वाने का काम प्राथमिकता से किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से गरीब, युवा, महिलाओं और कमजोर वर्गों के पात्र लोगों को मताधिकार से वंचित न होने देने पर जोर दिया। बसपा की संगठनात्मक टीम को बूथ स्तर पर ऐसे लोगों की पहचान और सहायता करने को कहा गया है।
उत्तराखंड सरकार पर भी साधा निशाना
बैठक में पदाधिकारियों से मिली रिपोर्ट के आधार पर मायावती ने उत्तराखंड सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार गरीब और आम जनता के हितों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दे रही है और बड़े पूंजीपतियों तथा धन्नासेठों के हितों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। मायावती ने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो सकता है। उनके इन आरोपों को बसपा की राजनीतिक स्थिति के तौर पर देखा जा रहा है।
आकाश आनंद की वापसी को लेकर चर्चा तेज
इसी बीच बसपा में आकाश आनंद की संभावित वापसी को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में आकाश आनंद ने मायावती से माफी मांगते हुए पार्टी में दोबारा सेवा करने का अवसर देने की अपील की थी। उन्होंने मायावती को अपनी राजनीतिक गुरु और ‘बुआ मां’ बताते हुए बसपा को अपना परिवार कहा था। साथ ही दूसरे राजनीतिक दल में जाने की खबरों को खारिज किया था। सूत्रों के हवाले से आकाश आनंद की 9 अक्टूबर से पहले वापसी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, उनकी वापसी को लेकर अभी कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
मायावती ने आकाश की वापसी को लेकर पहले रखी थी शर्त
आकाश आनंद की वापसी का मुद्दा इससे पहले भी चर्चा में रहा है। सितंबर में मायावती ने कहा था कि आकाश की सक्रिय भूमिका बहाल करने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेना होगा। बाद में बसपा संगठन में आकाश आनंद की जगह ईशान आनंद को जिम्मेदारी दिए जाने की खबरें सामने आई थीं। अब आकाश की ओर से मायावती से माफी मांगने के बाद उनकी संभावित वापसी को लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू हुई है।
वापसी हुई तो संगठन में बदलाव की संभावना
सूत्रों के मुताबिक, यदि आकाश आनंद की बसपा में वापसी होती है तो पार्टी के संगठन में उच्च स्तर पर बदलाव हो सकता है। हालांकि, फिलहाल यह केवल संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित है। उत्तराखंड चुनाव की तैयारियों के साथ ही बसपा नेतृत्व के सामने संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर की कमियों को दूर करने और मतदाता सूची में पात्र लोगों के नाम सुनिश्चित कराने की चुनौती है। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्टी के संगठनात्मक फैसलों पर नजर रहेगी।
