वसीम अहमद समेत 221 शिक्षामित्रों ने दाखिल की थी याचिका, जस्टिस मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने 24 सितंबर को सुरक्षित किया था फैसला
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को स्पेशल टीईटी 2026 में शामिल करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुना दिया। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने वसीम अहमद समेत 220 अन्य शिक्षामित्रों की याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि केवल सामान्य टीईटी में शामिल होने की पात्रता होने के आधार पर याचिकाकर्ता विशेष टीईटी में शामिल होने का दावा नहीं कर सकते।
24 सितंबर को सुरक्षित किया गया था फैसला
इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद 24 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। गुरुवार को अदालत ने अपना निर्णय सुनाते हुए शिक्षामित्रों को स्पेशल टीईटी में शामिल करने की मांग को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने शिक्षामित्रों और नियमित रूप से कार्यरत शिक्षकों की कानूनी स्थिति में अंतर को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत के अनुसार, यदि यह अंतर किसी वैध कानूनी उद्देश्य पर आधारित है तो संविधान राज्य से उस अंतर को समाप्त करने की मांग नहीं करता।
वसीम अहमद समेत 221 शिक्षामित्रों ने दाखिल की थी याचिका
स्पेशल टीईटी में शामिल होने का अवसर देने की मांग को लेकर वसीम अहमद समेत कुल 221 शिक्षामित्रों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि जब सामान्य टीईटी में शामिल होने के लिए वे पात्र हैं तो उन्हें विशेष टीईटी से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और याचिकाएं खारिज कर दीं।
3 नवंबर को होगी स्पेशल टीईटी
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 की अधिसूचना 3 सितंबर को जारी की थी। परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया 5 सितंबर से शुरू हुई थी और आवेदन की अंतिम तारीख 4 अक्टूबर निर्धारित की गई है। परीक्षा 3 नवंबर 2026 को ऑफलाइन और ओएमआर आधारित माध्यम से कराई जानी है। यह विशेष टीईटी पात्र कार्यरत शिक्षकों और विशेष शिक्षकों के लिए आयोजित की जा रही है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर से संबंधित अभ्यर्थी अपनी पात्रता के अनुसार पेपर-1 या पेपर-2 के लिए आवेदन कर सकते हैं।
शिक्षामित्र क्यों चाहते थे स्पेशल टीईटी में मौका?
शिक्षामित्र लंबे समय से अपनी सेवा को लेकर विभिन्न मांगें उठाते रहे हैं। स्पेशल टीईटी की घोषणा के बाद शिक्षामित्रों ने भी इस परीक्षा में शामिल होने का अवसर देने की मांग की थी। इसी मांग को लेकर वसीम अहमद समेत अन्य शिक्षामित्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हालांकि, अब अदालत के फैसले के बाद उन्हें स्पेशल टीईटी 2026 में शामिल होने का रास्ता नहीं मिला है।
सुप्रीम कोर्ट के टीईटी आदेश के बाद विशेष परीक्षा
स्पेशल टीईटी की व्यवस्था कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता से जुड़े न्यायिक निर्देशों की पृष्ठभूमि में लाई गई है। आयोग की अधिसूचना के मुताबिक परीक्षा कार्यरत पात्र शिक्षकों और संबंधित विशेष शिक्षकों के लिए है। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब स्पेशल टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल करने का मुद्दा फिलहाल न्यायिक स्तर पर खारिज हो गया है।
