अगस्त की फीडबैक समीक्षा में खुली शिकायत निस्तारण की पोल, संतुष्टि प्रतिशत रहा शून्य, डीएम ने अग्रिम आदेश तक वेतन आहरण पर लगाई रोक
बरेली : जनसुनवाई आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम) पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता और प्रभावशीलता को लेकर जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने सख्त रुख अपनाया है।अगस्त 2026 में प्राप्त शिकायतों के फीडबैक की समीक्षा के दौरान सात अधिकारियों से संबंधित प्रकरणों में शिकायतकर्ताओं द्वारा संतुष्टि का प्रतिशत शून्य पाया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों के वेतन आहरण पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं तो कार्रवाई तय
प्राप्त जानकारी के अनुसार जनसुनवाई (आईजीआरएस) और हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण के बाद शिकायतकर्ताओं से प्राप्त फीडबैक की समीक्षा की गई। अगस्त माह की समीक्षा में संबंधित सात अधिकारियों के मामलों में शिकायतकर्ताओं ने निस्तारण से संतुष्टि व्यक्त नहीं की। सभी संबंधित प्रकरणों में संतुष्टि का प्रतिशत शून्य मिलने के बाद जिला प्रशासन ने इसे शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता में गंभीर कमी के रूप में लिया। डीएम की ओर से संबंधित अधिकारियों के वेतन आहरण पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।इसके साथ ही अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता के तौर पर न किया जाए, बल्कि संवेदनशीलता, गुणवत्ता और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इन सात अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
समीक्षा में जिन अधिकारियों के प्रकरणों में शिकायतकर्ताओं का संतुष्टि प्रतिशत शून्य पाया गया।उनमें अधीक्षण अभियंता,बाढ़ कार्य मंडल,सिंचाई एवं जल संसाधन जिला उपायुक्त,मनरेगा जिला क्षय रोग अधिकारी पशु चिकित्सा अधिकारी,पशुपालन, शेरगढ़ प्रभारी चिकित्साधिकारी अधीक्षक, सीएचसी दमखोदा
प्राचार्य,जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) सब रजिस्ट्रार, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन,फरीदपुर शामिल हैं।
डीएम ने दिए गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश
डीएम अविनाश सिंह ने के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आईजीआरएस से संबंधित शिकायतों का निस्तारण करते समय शिकायत की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए और शिकायतकर्ता को संतुष्ट करने योग्य तथ्यपरक एवं गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई की जाए। शिकायत के निस्तारण की सूचना भी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि शिकायतकर्ता को वास्तविक कार्रवाई की जानकारी मिल सके। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में शिकायतकर्ताओं से लगातार असंतोषजनक फीडबैक प्राप्त होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
आईजीआरएस की नियमित होगी समीक्षा
जिला प्रशासन की ओर से आईजीआरएस प्रकरणों के निस्तारण की गुणवत्ता और शिकायतकर्ताओं से प्राप्त फीडबैक की नियमित समीक्षा जारी रहेगी। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि जनसुनवाई में आने वाली शिकायतों का निस्तारण समयबद्ध होने के साथ-साथ प्रभावी, पारदर्शी और तथ्यपरक भी हो।
